पत्नी और चार बेटियों के हत्यारे की फांसी की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने कहा- ऐसी नृशंसता के लिए उम्रकैद नाकाफी

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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने फैजाबाद सत्र न्यायालय की ओर से पत्नी और चार नाबालिग बेटियों के हत्यारे को फांसी की सजा देने के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कहा कि दीनदयाल तिवारी का केस रेयर ऑफ़ द रेयरेस्ट की श्रेणी में आता है। इस नृशंसता के लिए दोषी को उम्रकैद की सजा पर्याप्त नहीं है।
बता दें, दीनदयाल तिवारी को शक था कि उसकी पत्नी का गांव के ही किसी मर्द से अवैध संबंध है। इसी शक में देर रात उसने पत्नी की हत्या कर दी। मां को बचाने आई चार नाबालिग बेटियों को भी उसने कुल्हाड़ी से काटकर मार डाला था।
पुलिस ने मौके से ही अभियुक्त दीनदयाल को गिरफ्तार किया था। इस मामले में सत्र न्यायलय ने दीनदयाल को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद दीनदयाल ने सत्र न्यायलय के इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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