आंबेडकर विवि का अलग ही खेल, कार्यवाही के नाम पर पढ़ें कैसे की औपचारिकता

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आगरा: डा. भीमराव आंबेडकर ने पेपर लीक मामले में अछनेरा के आरोपित कालेज पर कार्यवाही के नाम पर अलग ही खेल खेला है। कालेज की अस्थाई संबद्धता को अस्थाई रूप से खत्म कर दिया है। कालेज इस साल प्रवेश नहीं ले पाएगा। अगले साल संबद्धता मिलेगी या नहीं, इसका फैसला तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर लिया जाएगा।

आगरा कालेज से पेपर लीक मामले में अछनेरा के श्री हरचरण लाल वर्मा का नाम सामने आया। पुलिस ने विगत बुधवार को इस कालेज के तथाकथित प्राचार्य अनेक सिंह को भी गिरफ्तार किया। इसके बाद गुरुवार को इस कालेज की संबद्धता खत्म करने की जानकारी कार्यवाहक कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने वर्चुअल प्रेसवार्ता में दी। प्रेसवार्ता में जानकारी दी गई कि इस कालेज ने 2015 में अस्थाई संबद्धता के लिए आवेदन किया था। बीए-बीएससी में अनुमोदित शिक्षक नहीं थे, इसकी जानकारी विश्वविद्यालय द्वारा कालेज का सत्यापन करने गई टीम ने दी थी। इसके बाद कालेज ने समय मांगा और कहा कि जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति कर दी जाएगी। 2018 में स्थाई संबद्धता के लिए आवेदन किया, तब तक भी अनुमोदित शिक्षक नहीं थे। प्राचार्य भी नहीं थे, लेकिन विश्वविद्यालय ने एक साल के लिए इस कालेज की संबद्धता को बढ़ा दिया। इसी बीच बीएड पाठ्यक्रम शुरू करने की संस्तुति कालेज को मिल चुकी थी। बीएड में 16 शिक्षकों की रिपोर्ट विश्वविद्यालय को दी गई थी। कोविड काल में सभी कालेजों की संबद्धता को विस्तारित कर दिया गया था, इसका लाभ इस कालेज को मिला।

2015 में प्रो. मो. मुज्जमिल थे कुलपति
प्रेस वार्ता में कार्यवाहक कुलपति ने कहा कि पूर्व में विश्वविद्यालय में कई स्तर पर गलतियां हुई हैं। बता दें कि जिस साल श्री हरचरण लाल वर्मा महाविद्यालय ने संबद्धता के लिए आवेदन किया था, उस समय कुलपति की जिम्मेदारी प्रो. मो. मुज्जमिल के पास थी।

परीक्षा केंद्र बनाने की जिम्मेदारी केवल एक अधिकारी की नहीं होती है। इसमें पूरा सिस्टम काम करता है। केंद्र निर्धारण से पहले भौतिक सत्यापन कराना अनिवार्य है, जिसे विश्वविद्यालय भूल चुका है। कालेज जो जानकारी विश्वविद्यालय को उपलब्ध करा देते हैं, उसके आधार पर निर्धारण हो जाता है। सूत्र बताते हैं कि केंद्र निर्धारण से पहले देर शाम तक विश्वविद्यालय में कई कालेज संचालकों, नेताओं और छात्र नेताओं की भी आमद रहती है। इस सिस्टम की जांच कराने की जिम्मेदारी किसकी है, इस पर अभी विश्वविद्यालय प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।

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