UP: सेल्फ फंडेड मदरसों के सर्वे के विरोध में जमीयत उलमा-ए-हिन्द की बड़ी बैठक

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लखनऊ: प्रदेश की योगी सरकार ने सूबे में सचालित हो रहे सभी गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का आदेश दिया है. सभी जिलों के जिलाधिकारियों से इस संबंध में एक महीने के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है. उधर योगी सरकार के इस फैसले का विरोध जमीयत उलमा-ए हिंद ने किया है. मंगलवार को जमीयत उलमा-ए हिंद की एक बड़ी बैठक दिल्ली में चल रही है, जिसमें यूपी के सभी जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले करीब 150 मदरसों के प्रमुख शामिल हो रहे हैं।

इस बैठक में सेल्फ फंडेड मदरसों की फूंडिंग को पारदर्शी बनाने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी. साथ ही यूपी सरकार के सर्वे के प्रभाव और मदरसों की रणनीति पर चर्चा होगी. इन मदरसों को मान्यता दिलाने को लेकर जमीयत का कहना है कि मान्यता दिलाने की कोशिश नहीं करेंगे, बल्कि सेल्फ फंडेड मदरसों की स्वायत्तत्ता की रक्षा कैसे की जाए इस पर चर्चा होगी. मदरसों पर लगने वाले आरोपों आदि पर भी चर्चा होगी।

दरअसल, योगी सरकार के जरिए मदरसों के सर्वे के आदेश दिए जाने के बाद दिल्ली में जमीयत उलमा हिंद ने एक अहम मीटिंग बुलाई है. सुबह से ही मीटिंग जारी है. इस मीटिंग में यूपी मदरसों से जुड़े हुए सभी जिम्मेदार लोग मौजूद हैं. मीटिंग के दौरान सरकार की तरफ से की जा रही मदरसों में मुदाख़लत का विरोध किया जा रहा है. वहीं आगे की रणनीति भी तैयार की जा रही है. मीटिंग में सर्वे के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन न करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
उधर मदरसों के सर्वे के फैसले पर यूपी के अल्पसंख्यक मंत्री दानिश अंसारी ने कहा कि मदरसों को मोर्डर्न एजुकेशन से जोड़ने के लिए यह सर्वे करवाया जा रहा है. सर्वे के बाद ही सरकार को पता चलेगा कि मदरसों को कैसे आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाए, ताकि छात्रों का भविष्य उज्जवल हो सके।

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