कुशीनगर. यूपी के कुशीनगर जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के सेमरा गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में हुई चोरी की तफ्तीश करने पहुंचे दरोगा अतुल कुमार बच्चों को पढ़ते हुए देख वह अपने अंदर के अध्यापक को रोक नहीं पाए और क्लास में जाकर बतौर शिक्षक की तरह पढ़ाने लगे. बच्चों से सवाल पूछे, उनके सवालों का बड़े ही सरलता से जबाब भी दिया. बच्चों को सरल तरीके से गणित के सवाल हल करने की तकनीक भी समझाई. ‘दरोगा की पाठशाला’ का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग इनकी प्रशंसा कर रहे हैं।
टीचर के रूप में दरोगा को देख बच्चे भी काफी उत्साहित दिखे. कप्तानगंज क्षेत्र के सेमरा गांव स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में सोमवार को चोरी हुई थी, जिसमें प्रधानाध्यापक की तहरीर पर कप्तानगंज थाने में मुकदमा पंजीकृत कराया गया. मंगलवार को मामले की तफ्तीश करने दरोगा अतुल कुमार विद्यालय पहुंचे. यहां उन्होंने क्लास में बच्चों को पढ़ते हुए देखा तो दरोगा बनने से पहले शिक्षक का दायित्व निभा चुके अतुल कुमार खुद को रोक नहीं पाए. दरोगा की वर्दी में ही हाथ में चॉक लिए ब्लैक बोर्ड पर बच्चों को गणित के सवालों को हल करने का सरल तरीका बताने लगे. लगभग एक घंटे की क्लास लेने बाद जाते समय दरोगा अतुल कुमार बच्चों से दोबारा आकर पढ़ाने का वादा भी किया।
उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि स्कूल में पुलिस देखकर पहले तो उन्हें डर लगा, लेकिन जब वह हम लोगों को पढ़ाने लगे तो ऐसा लग रहा था वह दरोगा नहीं बल्कि एक अध्यापक हैं. उन्होंने हमें जोड़, घटाना, गुणा, भाग करना सिखाया जिसे हमने बेहतर रूप से समझ लिया. छात्रों का कहना था आज तक हम लोग पुलिस वालों को देखकर डरते थे और जैसे ही दरोगा जी स्कूल में आए हमें डर लगने लगा. पर उन्होंने कहा हमसे डरो मत हम तुम्हे पढ़ाने आए हैं. फिर उन्होंने गणित के सवालों को समझाया।
माध्यमिक विद्यालय सेमरा के प्रधानाचार्य जन्मेजय पाण्डेय का कहना है कि दरोगा जी चोरी की तफ्तीश करने आए थे पर बच्चों को पढता देख खुद को नहीं रोक पाए. प्रधानाध्यापक ने कहा कि दरोगा जी ने उन शिक्षकों को संदेश दिया है जो विद्यालय नहीं आते और अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं करते.आजमगढ़ जिले के मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले उपनिरीक्षक अतुल कुमार का कहना है कि शुरुआत में वह बीटेक की पढ़ाई कर नोएडा की प्राइवेट कंपनी में आईटी डिपार्टमेंट काम करते थे. वर्ष 2014 की दरोगा भर्ती में अपनी उस नौकरी को छोड़ दिए. लेकिन भर्ती को लेकर हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद काफी समय लग गया. आर्थिक स्थिति को देखते हुए हमने एक सीबीएसई बोर्ड के प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया. कुछ ही दिनों बाद 69000 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अपने जिल में ही शिक्षक के पद पर नियुक्ति हो गयी. जहां पर रहकर हमने बच्चों के बीच काफी समय गुजारा है. गणित विषय से हमारा काफी लगाव है. कोर्ट से दरोगा भर्ती का निस्तारण होने के बाद वर्ष 2019 में ट्रेनिंग में चला गया. जनवरी 2022 में कुशीनगर जिले के कप्तानगंज मे मेरी पहली पोस्टिंग हुई है।









