Amroha के गुरुद्वारा में राष्ट्रध्वज का अपमान, धार्मिक झंडे से ऊंचे लगे तिरंगे को उतारकर जमीन में डाला

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अमरोहा : अमरोहा के गुरुद्वारे में राष्ट्रध्वज के अपमान का मामला सामने आया है। वहां धार्मिक झंडे से अधिक ऊंचाई पर लगे राष्ट्र ध्वज को पंजाब से आए जत्थे ने उतरवा कर नीचे फेंक दिया। साथ ही उसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दी।

राष्ट्रध्वज के अपमान का वीडियो वायरल
वीडियो इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अमरोहा पहुंच गई। मामला संज्ञान में आने पर रजबपुर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वीडियो में पंजाब के जत्थे में शामिल लोग कह रहे हैं कि गुरुद्वारे में तिरंगा नहीं लगना चाहिए। लगाना है तो अपने घर पर लगाओ।

राष्ट्रध्वज के अपमान का यह मामला रजबपुर थाना क्षेत्र के गांव सूदनपुर में स्थित गुरुद्वारा से जुड़ा है। थाने में तैनात दारोगा द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक यहां पर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा लगाया गया था। बताते हैं कि ऊंचाई के हिसाब से तिरंगा गुरुद्वारा में लगे निशान साहिब से ऊंचा था।

धार्मिक झंडे से ऊंचा तिरंग लगाने पर जताया विरोध
इसकी जानकारी पंजाब में रहने वाले निहंग जत्थे को हुई थी। लगभग 10 दिन पहले पंजाब से चार निहंग यहां गुरुद्वारा पहुंचे तथा विरोध जताया। उन्होंने गुरुद्वारा के ग्रंथी नेपाल सिंह से जबरन तिरंगा नीचे उतरवाया। उतारते समय तिरंगा नीचे गिर गया। साथ ही जत्थे में शामिल एक निहंग ने लगभग ढाई मिनट की वीडियो भी बनाया है।

जिसमें कहा है कि हिंदुस्तान का तिरंगा नहीं बल्कि सबसे ऊंचा हमारा निशान साहिब रहेगा। यह वीडियो जत्थे के लोगों ने पंजाब में जाकर वायरल किया था। जोकि दो दिन पहले इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अमरोहा में वायरल हुआ है। इस मामले दारोगा रवि कुमार की तहरीर पर गुरुद्वारा के सेवक नेपाल सिंह व चार अज्ञात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कर ली है।

एएसपी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि राष्ट्रध्वज से संबंधित मामला पुराना है। परंतु इंटरनेट मीडिया के माध्यम प्राप्त वीडियो के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। अन्य साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं। मामले की जांच शुरू करा दी है।

गुरुद्वारे के ग्रंथी ने दी सफाई
सूदनपुर गुरुद्वारा के ग्रंथी नेपाल सिंह ने बताया कि चार लोग पंजाब से आए थे। उन्होंने धमका कर तिरंगा उतारने के लिए कहा था। तिरंगा उतारते समय संतुलन बिगड़ने से गिर गया था। जिसे बाद में सम्मानपूर्वक रख दिया गया था। हम देशभक्त हैं, तिरंगे का अपमान करने का सवाल ही नहीं उठता।

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