अब सांड या नीलगाय के हमले में हुयी मौत भी राज्य आपदा, मुआवजा देगी योगी सरकार

Facebook
X
WhatsApp

उत्तर प्रदेश में सांड और नीलगाय के हमले में जान गंवाने वाले व्यक्तियों के परिजन को सरकार ने मुआवजा देने की घोषणा की है. ऐसे मृतकों के परिजनों को अब चार लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा. राज्य सरकार ने ऐसी घटनाओं को आपदा की घटनाओं की सूची में शामिल किया है. उत्तर प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के जरिये राज्‍य आपदा की सूची में यह नयी प्रविष्टि की गयी है. इस सप्ताह के अंत में जारी अधिसूचना में सांड और नीलगाय के हमले के कारण हुई मौतों को राज्य आपदा घोषित किया गया है।

बता दें कि अब तक बेमौसमी अत्यधिक बारिश, आकाशीय बिजली गिरने, तूफान, लू, नौका दुर्घटना, सर्पदंश, सीवर की सफाई के दौरान मौत, गैस के उत्सर्जन, बोरवेल में गिरने, मानव-पशु संघर्ष और कुएं में डूबने से हुई मौतों को ही इस सूची में शामिल किया गया था. नदी, झील, तालाब, नहर, खाई और झरने को पहले ही राज्य आपदा (राज्य आपदा) के रूप में वर्गीकृत किया जा चुका है।

प्रखंड स्तर पर गौशालाओं का हो रहा निर्माण
आपको बता दें कि इस साल जुलाई में उत्तर प्रदेश के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा था कि राज्य में 6,222 गौशालाएं हैं. जिनमें 8.55 लाख मवेशियों को रखा गया है. उन्होंने कहा था कि इस साल अप्रैल से अब तक राज्य में 66,000 आश्रयहीन गोवंशीय पशुओं का पुनर्वास किया गया है. उन्होंने कहा था कि प्रखंड स्तर पर विशाल गौशालाएं बनाई जा रही हैं, जहां 400 जानवरों को रखा जा सकता है. मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 225 ऐसे आश्रय स्थल हैं और इस वर्ष के अंत तक इस संख्या को 280 तक ले जाने की योजना है.उन्‍होंने कहा था कि हम गौमाता को सम्मान देने के लिए काम कर रहे हैं।

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के 2019 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 11,84,494 आवारा मवेशी हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं. सड़कों पर आने-जाने वालों के लिए खतरा पैदा करने के अलावा ये घूमने वाले जानवर फसलों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. विभाग ने एक योजना भी शुरू की है, जिसके तहत कोई व्यक्ति आवारा मवेशियों को अपने घर या खेत में रख सकता है और उसे प्रतिदिन 30 रुपये प्रति पशु का भुगतान किया जाता है।

पशुपालन विभाग के ये हैं आंकड़े
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के तहत वर्तमान में कुल 1.38 लाख आवारा मवेशियों को रखा गया है. सिंह ने कहा था, ‘अच्छी संख्या में आवारा मवेशी दूध देने वाली प्रजातियों के हैं, जो गरीब परिवारों को दिए जा सकते हैं. जो उनकी देखभाल कर सकते हैं और दूध प्राप्त कर सकते हैं. उन्‍होंने कहा था कि बड़े आश्रय गृह बनाने की योजना है और ताकि हर जिले में कम से कम दो हजार या अधिक मवेशी रखे जा सकें।

The specified slider does not exist.

ताजा खबरें