Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के महमूदपुर गांव के रहने वाले संतोष सिंह एक कुख्यात अपराधी हैं। उनके आतंक का दायरा केवल महमूदपुर तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैला हुआ है। संतोष सिंह का आतंक आज से नहीं बल्कि बीते कई दशकों से कायम है।
मायावती की सरकार में संतोष सिंह कूरेभार थाने का “मोस्ट वांटेड” हुआ करता था। (Sultanpur) तब वह सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय बड़े नेताओं का दरबारी हो गया था। इस कारण लोकल थाने में उसकी हिस्ट्रीशीट को दबा दिया गया था। इस बीच वह चुनाव जीतकर जनप्रतिनिधि बन गया।
गांव देहात के सैकड़ों जॉबकार्ड धारकों से पैसे वसूलने के लिये बैंक के बाहर लट्ठमार बैठा दिया! (Sultanpur) महमूदपुर के जितने भी गरीब जॉब कार्ड धारक थे वह इसकी दहशत के आगे घुटने टेक देते थे। इसी कारण आजतक किसी ने भी इससे टक्कर लेने की कोशिस नही की, न ही इसके मामले में कभी जल्दी कोई दरख़्वास्त पड़ी।गावँ का गरीब, मजदूर शहर और प्रदेश जाकर कमाई करता था ।
कामगारों के खाते में जब मनरेगा का पैसा आता था तो यही जॉब कार्ड धारक पेंशन की तरीके से महीने का ₹500 रखते थे बाकी का हजारों -हजार रुपए व संतोष सिंह के गुर्गे बैंक के बाहर छीन लेते थे, दहशत में कोई बोलता नही था, मनबढ़ संतोष सिंह दिन-रात आगे बढ़ता गया। (Sultanpur) बड़े जनप्रतिनिधियों ने भी उसे चुनाव में वोट का ठेका देने लगे ।वह क्षेत्र में हजारों वोट यूं ही बटन से पड़वा देने में माहिर हो गया ।उसके आगे कोई चूं नही बोलता था।
Sultanpur: मायावती की सरकार में इनकाउंटर के भय से जिला अस्पताल में हुआ था भर्ती!
एक समय था कि वह 2007 के आसपास मायावती की सरकार में इतना दहशत में आ गया उनसे जिला अस्पताल भर्ती होना पड़ा था ।एनकाउंटर का भय उसे सताने लगा था !लेकिन धीरे-धीरे उसने भाजपा की योगी सरकार को भी अपने इशारे पर नचाने लगा और क्षेत्र में इसी तरीके के दर्जनों अपराध करके वह अपनी जरायम की दुनिया की खेती बाड़ी करता था !संतोष सिंह नाम दहशत का पर्याय बन गया है । यह चंबल के बीहड़ डाकू से काम नहीं !










