UP Politics : उत्तर प्रदेश का प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी में उपेक्षा की शिकायत के साथ राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने पद से इस्तीफा दे दिया था। स्वामी प्रसाद मौर्य ने सोमवार (19 फ़रवरी) को नई पार्टी के गठन की घोषणा की। स्वामी प्रसाद ने नई पार्टी का नाम और झंडा लॉन्च भी कर दिया है। उनकी पार्टी का नाम राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी (Rashtriya Shoshit Samaj Party) होगा।
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स्वामी प्रसाद के इस फैसले से समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव सहित उन तमाम दलों को धक्का पहुंचेगा जो दलित, शोषित और पिछड़े की बात करते रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशियों को लेकर मची कलह के बीच स्वामी प्रसाद मौर्य का ये बड़ा सियासी कदम है। निश्चय ही ये समाजवादी पार्टी के लिए समस्या बढ़ाने वाली होगी।

UP Politics : एक्शन मोड़ में स्वामी, राहुल की यात्रा में होंगे शामिल
स्वामी प्रसाद मौर्य ने न सिर्फ नई पार्टी बनाई बल्कि वो एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने 22 फरवरी को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में रैली को संबोधित करने का भी ऐलान किया। साथ ही, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ में भी शामिल होंगे। इसके लिए स्वामी प्रसाद 20 फरवरी को रायबरेली जाएंगे। सपा से नाराज स्वामी प्रसाद ने आखिरकार अपना अलग रास्ता चुन ही लिया। हालांकि, अभी उनके साथ इस पार्टी में कौन-कौन रहेगा, ये स्पष्ट नहीं हो सका है।

UP Politics : स्वामी के समर्थन में खुलकर आए थे राम गोविंद चौधरी

बीते दिनों जब स्वामी प्रसाद ने सपा के राष्ट्रीय महासचिव पद से इस्तीफा दिया था तब पार्टी वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के बेहद करीबी राम गोविंद चौधरी उन्हें मनाने पहुंचे थे। राम गोविंद ने अखिलेश यादव को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि, वो स्वामी प्रसाद का इस्तीफा स्वीकार ना करें। पूर्व कैबिनेट मंत्री और विपक्ष के नेता रहे राम गोविंद चौधरी खुलकर स्वामी के पक्ष में खड़े नजर आए थे। राम गोविंद ने स्वामी को अखिलेश की PDA के हक़ में लड़ने वाला नेता भी बताया था। कहा था, उनके जाने से पार्टी को नुकसान होगा।

UP Politics : आखिर क्या होगा स्वामी प्रसाद का सियासी एजेंडा ?
अब सवाल उठना लाजमी है कि, स्वामी प्रसाद मौर्य के इस कदम से यूपी की सियासत में क्या बदलाव आएगा? गौर से देखें तो स्वामी प्रसाद इन दिनों दलित और पिछड़ों की सियासत के साथ आगे बढ़ रहे हैं। सामाजिक न्याय के मुद्दे पर वो मुखर होकर बोलते रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने सपा के महासचिव पद से इस्तीफा भी दिया। माना जा रहा है कि, राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के जरिए वो दलित और पिछड़ों के एजेंडे को लेकर आगे बढ़ेंगे।

स्वामी प्रसाद मौर्य को बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक कांशीराम और डॉ भीमराव अंबेडकर की सियासी विचारधारा का समर्थक माना जाता है। हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि, स्वामी प्रसाद मौर्य कांशीराम की सियासी प्रयोगशाला से ही निकले हैं। वो सबसे ज्यादा मुखर ‘ब्राह्मणवाद’ के खिलाफ ही रहे हैं। बसपा में रहते उनकी ये राजनीति खूब फली-फूली। लेकिन, समाजवादी पार्टी में रहते वो ऐसा नहीं कर पा रहे थे।









