Shukra Pradosh Vrat Katha: इस त्रयोदशी व्रत पर पढ़ें ये व्रत कथा, होंगी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण

Shukra Pradosh Vrat Katha, शुक्र प्रदोष व्रत कथा
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Shukra Pradosh Vrat Katha: इस मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी व्रत 13 दिसंबर 2024 को रखा जाएगा। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहिले प्रारम्भ होकर सूर्यास्त के बाद 45 मिनट तक होता है। इस बार यह प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इस दिन इस शुक्र प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। जिससे भक्तजनों की सभी मनोकामनाएँ भगवान शिव अवश्य ही पूर्ण करेंगे।

शुक्र प्रदोष व्रत कथा

सूत जी बोले– प्राचीन काल की बात है एक नगर में तीन मित्र रहते थे, तीनों में ही घनिष्ट मित्रता थी। उसमें एक राजा का बेटा, दूसरा ब्राह्मण पुत्र, तीसरा सेठ पुत्र था। राजकुमार व ब्राह्मण पुत्र का विवाह हो चुका था। सेठ पुत्र का विवाह के बाद गौना नहीं हुआ था। एक दिन तीनों मित्र आपस में स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण-पुत्र ने नारियों की प्रशंसा करते हुए कहा- “नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।” सेठ-पुत्र ने यह वचन सुनकर अपनी पत्नी लाने का तुरन्त निश्चय किया। सेठ-पुत्र अपने घर गया और अपने माता-पिता को अपना निश्चय बताया।

उन्होंने बेटे से कहा कि शुक्र देवता डूबे हुए हैं। इन दिनों बहु-बेटियों को उनके घर से विदा कराकर लाना शुभ नहीं, अतः शुक्रोदय के याद तुम अपनी पत्नी को विदा करा लाना। सेठ पुत्र अपनी जिद से टस से मस नहीं हुआ और अपनी सुसराल जा पहुंचा। सास-ससुर को उसके इरादे का पता चला। उन्होंने उसको समझाने की कोशिश की किन्तु वह नहीं माना। अतः उन्हें विवश हो अपनी कन्या को विदा करना पड़ा। ससुराल से विदा होकर पति-पत्नी नगर से बाहर निकले ही थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया टूट गया और एक बैल की टांग टूट गई। पत्नी को भी काफी चोट आई। सेठ-पुत्र ने आगे चलने का प्रयत्न जारी रखा तभी डाकुओं से भेंट हो गई और वे धन-धान्य लूटकर ले गए।

सेठ का पुत्र पत्नी सहित रोता-पीटता अपने घर पहुंचा। जाते ही उसे सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्यों को बुलाया। उन्होंने देखने के बाद घोषणा की कि आपका पुत्र 3 दिन में मर जाएगा। उसी समय इस घटना का पता ब्राह्मण पुत्र को लगा। उसने सेठ से कहा कि आप आने लड़के को पत्नी सहित बहू के घर वापस भेज दो। यह सारी बाधाएं इस कारण से आई हैं कि आपका पुत्र शुक्रास्त में पत्नी को विदा कर लाया है, यदि यह वहां पहुंच जाएगा तो बच जाएगा। सेठ को ब्राह्मण-पुत्र की बात जंच गई और अपनी पुत्रवधु और पत्र को वापिस लौटा दिया। वहां पहुंचते ही सेठ-पुत्र की हालत ठीक होनी आरंभ हो गई। तत्पश्चात उन्होंने शेष जीवन उन्‍होंने साथ में सुखपूर्वक बिताया और मृत्‍यु के बाद स्‍वर्ग लोक को गए।

प्रदोष व्रत कथा के साथ भगवान शिव की चालीसा और शिव जी आरती का भी पाठ किया जाता है।

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