Abhijeet Dipke on PM Modi: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर माफी मांगने की मांग की है। दीपके ने कहा कि जिन छात्रों को लाठीचार्ज, पेलेट गन और पुलिस कार्रवाई में चोटें आईं, उनसे पहले माफी मांगी जाए, उसके बाद ही क्षमा की बात की जाए।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा हाल ही में प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने वाले छात्रों को माफ करने की अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए दीपके ने कहा कि “जिन छात्रों के सिर फूटे, जिन पर पेलेट गन चली, जिनके हाथ-पैर टूटे, पहले उनसे माफी मांगिए। उसके बाद ही क्षमा की बात कीजिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई अभूतपूर्व थी और इसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।
Abhijeet Dipke on PM Modi: ‘सिर्फ इंस्टाग्राम वीडियो नहीं, केस भी वापस लें’
दीपके ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तव में छात्रों को माफ करना चाहती है तो यह केवल सोशल मीडिया वीडियो तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, “सिर्फ इंस्टाग्राम पर वीडियो डालकर माफी की बात मत कीजिए। पुलिस को निर्देश दीजिए कि छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।”
दीपके ने कहा कि छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म किए बिना क्षमा की अपील महज औपचारिकता साबित होगी।
PM मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक वीडियो संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने वाले छात्रों के प्रति नरमी बरतने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि युवावस्था में गलतियां हो सकती हैं और समाज का दायित्व है कि वह छात्रों को सुधारने का अवसर दे। मोदी ने यह भी कहा था कि लंबे समय तक अदालतों के चक्कर लगवाना या सामाजिक बहिष्कार किसी समस्या का समाधान नहीं है।
BJP IT सेल पर भी साधा निशाना
अभिजीत दीपके ने बीजेपी की आईटी सेल पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वर्षों से बीजेपी आईटी सेल से जुड़े लोग महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और रेप की धमकियां देते रहे हैं।
दीपके ने आरोप लगाया कि जिन सोशल मीडिया अकाउंट्स पर “Followed by PM Modi” दिखाई देता है, उन्हें शीर्ष नेतृत्व का संरक्षण मिलने का संदेश जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अभद्र भाषा के मामले में छात्रों पर केस दर्ज हो सकते हैं, तो महिलाओं के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती।









