Zia-ul-Haq Murder Case: उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री और प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को 2013 के चर्चित डीएसपी जिया-उल-हक हत्याकांड में बड़ी राहत मिली है। लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत (Special CBI Court) ने शनिवार को इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। अदालत के इस आदेश के साथ ही राजा भैया समेत मामले में नामजद सभी पांच आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई।
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई प्रतिभा सिंह ने सीबीआई की ओर से की गई नए सिरे की जांच में जुटाए गए सबूतों और दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद यह आदेश दिया। अदालत ने मामले से जुड़े पक्षों की दलीलें भी सुनीं। इसके बाद कोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है।
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Zia-ul-Haq Murder Case: 2 मार्च 2013 को हुई थी हत्या
यह पूरा मामला 2 मार्च 2013 का है। उस दिन प्रतापगढ़ के कुंडा इलाके के बलीपुर गांव के प्रधान नन्हे सिंह यादव की हत्या कर दी गई थी। प्रधान की हत्या के बाद उनके समर्थक हथियारों के साथ गांव में पहुंच गए थे। इसके बाद गांव में तनाव और अफरा-तफरी का माहौल बन गया था।
घटना के दौरान कुंडा के कोतवाल सर्वेश मिश्रा अपनी टीम के साथ नन्हे सिंह यादव के घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। इसी बीच डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस जिया-उल-हक (DySP Zia-ul-Haq) दूसरे रास्ते से गांव के प्रधान के घर की ओर बढ़े।
गांव वालों ने जिया-उल-हक को घेरा
बताया गया कि गांव में उस समय फायरिंग हो रही थी। जिया-उल-हक की सुरक्षा में तैनात गनर इमरान और कुंडा के एसएसआई विनय कुमार सिंह भी एक खेत में जाकर छिप गए थे। इसी दौरान जैसे ही जिया-उल-हक गांव पहुंचे, ग्रामीणों ने उन्हें घेर लिया।
इसके बाद भीड़ ने जिया-उल-हक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी और मामला राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आया था।
दर्ज हुई थीं दो एफआईआर
डीएसपी जिया-उल-हक की हत्या के मामले में दो एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थीं। इनमें से एक एफआईआर तत्कालीन हथिगवां थाना प्रभारी ने दर्ज कराई थी, जबकि दूसरी एफआईआर जिया-उल-हक की पत्नी परवीन आजाद ने दर्ज कराई थी।
परवीन आजाद ने अपने पति की हत्या के पीछे साजिश का आरोप लगाया था। उन्होंने इस मामले में राजा भैया के अलावा गुलशन यादव, हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह को आरोपी बनाया था।
CBI ने 2013 में दाखिल की थी चार्जशीट
सीबीआई के वकील केपी सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि दोनों मामलों को बाद में एक मामले में मिला दिया गया था। इसके बाद सीबीआई ने साल 2013 में चार्जशीट (Chargesheet) भी दाखिल की थी।
हालांकि, जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में क्लोजर रिपोर्ट (Closure Report) का घटनाक्रम सामने आया। सीबीआई ने सबसे पहले 31 जुलाई 2013 को क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
इसके बाद जिया-उल-हक की पत्नी परवीन आजाद ने इस रिपोर्ट को चुनौती देते हुए प्रोटेस्ट पिटीशन (Protest Petition) दाखिल की। उन्होंने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर आपत्ति जताई और मामले में आगे जांच की मांग की।
कोर्ट के आदेश के खिलाफ HC पहुंची थी CBI
प्रोटेस्ट पिटीशन पर सुनवाई के बाद अदालत ने आगे जांच के निर्देश दिए थे। सीबीआई ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में चुनौती दी।
हालांकि, हाईकोर्ट ने सीबीआई की याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद परवीन आजाद ने मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में उठाया।
सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद सीबीआई को इस मामले की नए सिरे से जांच करने का निर्देश दिया था। इसी निर्देश के बाद एजेंसी ने मामले की फिर से जांच की।
2023 में फिर दाखिल हुई क्लोजर रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सीबीआई ने मामले की नए सिरे से जांच की। जांच पूरी करने के बाद एजेंसी ने 22 दिसंबर 2023 को लखनऊ की विशेष अदालत के सामने फिर से क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि राजा भैया और मामले में नामजद दूसरे आरोपियों के खिलाफ आगे कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं। एजेंसी की जांच के आधार पर अदालत से मामले को बंद करने की मांग की गई थी।
नहीं मिला पर्याप्त आधार
अब विशेष सीबीआई अदालत ने सीबीआई की इसी क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और सीबीआई की आगे की जांच के दौरान जुटाई गई सामग्री की समीक्षा की।
अदालत ने पाया कि राजा भैया, गुलशन यादव, हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ आगे कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री और सीबीआई की आगे की जांच को देखने के बाद शिकायतकर्ता की ओर से दाखिल प्रोटेस्ट पिटीशन में उठाए गए तर्कों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही आगे बढ़ाने का पर्याप्त आधार नहीं बनता है।
सभी पांच के खिलाफ कार्यवाही खत्म
विशेष अदालत के आदेश के बाद इस मामले में नामजद सभी पांच आरोपियों के खिलाफ चल रही कार्यवाही समाप्त हो गई है। कोर्ट ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए राजा भैया, गुलशन यादव, हरिओम श्रीवास्तव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ कार्यवाही को खत्म कर दिया।
इस तरह करीब एक दशक से ज्यादा समय से चले आ रहे इस चर्चित मामले में राजा भैया को अदालत से बड़ी राहत मिली है। मामला 2013 में डीएसपी जिया-उल-हक की हत्या के बाद शुरू हुआ था और इसकी जांच कई चरणों से होकर गुजरी। पहले सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, फिर उस पर आपत्ति जताई गई, जांच के आदेश को लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा और आखिरकार नए सिरे से जांच के बाद सीबीआई ने दोबारा क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
अब लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है और मामले में नामजद पांचों आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी है।










