राजस्थान: बांसवाड़ा जिले में दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। जिसमें एक मरीज को लेकर जा रही एंबुलेंस का बीच सड़क पर डीजल खत्म हो गया। इसके बाद मरीज की परिजनों ने एक किलोमीटर तक एंबुलेंस को धक्का दिया लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका। बीच राह में ही मरीज ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। दूसरी एंबुलेंस तत्काल बुलाई गई लेकिन उसे पहुंचने में 40 मिनट लग गए।
पिता की तबियत खराब होने की जानकारी बेटी ने अपने पति को दी थी। जिस पर उसने एम्बुलेंस 108 पर सूचना दी थी। इस बीच बेटी अपने पिता को लेकर तेजपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गई, जहां ईसीजी मशीन नहीं होने पर उन्हें छोटी सरवन के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भेजा। इस बीच बेटी का पति जो बांसवाड़ा में किराए का कमरा लेकर नीट की तैयारी कर रहा था वह बाइक से गांव आया और उसने अपने ससुर को सीधे जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी की।
सूचना से सवा घंटे देरी से पहुंची एम्बुलेंस से पिता को जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था कि रतलाम रोड पर टोल के आगे पहुंचते ही एम्बुलेंस का डीजल खत्म हो गया। एम्बुलेंस के पायलट ने पांच सौ रुपए देकर मरीज के रिश्तेदार को डीजल लेने भेजा लेकिन डीजल लेकर आने में समय लग गया।
इस बीच मरीज के परिजन एम्बुलेंस को एक किलोमीटर तक धक्का लेकर चलाते रहे। जब वह थककर चूर हो गए तो उन्होंने एम्बुलेंस चालक काके दूसरी एंबुलेंस मंगाने की गुहार की। तब एंबुलेंस चालक ने दूसरे चालक को फोन कर दूसरी एंबुलेंस बुलाई लेकिन उसे आने में चालीस मिनट लग गए और मरीज ने तड़पते हुए दम तोड़ दिया। हालांकि मरीज को जिला अस्पताल ले जाया गया लेकिन चिकित्सकों मरीज को मृत घोषित कर दिया।









