रिपोर्ट -रानू सिंह
Barabanki: फतेहपुर, बाराबंकी। तहसील फतेहपुर बार एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ताओं की समस्याओं और उनके मौलिक अधिकारों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु को संबोधित मांग-पत्र उप जिलाधिकारी फतेहपुर तथा ग्राम न्यायालय के न्यायाधीश को सौंपा गया।
मांग-पत्र में कहा गया है कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के मनमाने रवैये के चलते लगातार अधिवक्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और उनके मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। पूरे देश में छात्र संगठन, सरकारी कर्मचारी, आईएएस-पीसीएस अधिकारी, व्यापारी, किसान तथा श्रमिक संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करते हैं, जिन पर इस तरह की रोक नहीं लगाई जाती।

बार एसोसिएशन ने कहा कि अधिवक्ता भी अपनी स्थानीय प्रशासनिक एवं न्यायिक समस्याओं से जूझते आ रहे हैं। अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अधिवक्ताओं द्वारा हड़ताल की जाती रही है और इसी के माध्यम से कई मामलों का निस्तारण भी कराया जाता रहा है।
मांग-पत्र में आरोप लगाया गया है कि पिछले करीब चार महीनों से लगातार अधिवक्ता संगठनों से हड़ताल नहीं करने की बात कही जा रही है तथा इसके लिए अंडरटेकिंग भरवाने का दबाव बनाया जा रहा है। अधिवक्ताओं ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्हें अपनी समस्याओं को उठाने और उनके समाधान के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने का अधिकार मिलना चाहिए।

बार एसोसिएशन ने महामहिम राष्ट्रपति से मांग की है कि अधिवक्ताओं की समस्याओं के निदान के लिए उनके मौलिक अधिकारों और धरना-हड़ताल करने के अधिकार को छीना न जाए। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को हटाकर नए चेयरमैन का चुनाव अविलंब कराया जाए तथा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन को राज्यसभा के सदस्य पद से हटाया जाए।
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि अधिवक्ता समाज न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनकी समस्याओं का समाधान संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए। मांग-पत्र के माध्यम से राष्ट्रपति से अधिवक्ताओं की मांगों पर गंभीरता से विचार कर उचित कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।










