Barabanki News: बाराबंकी में जिला जज की हार्ट अटैक से मौत, 3 महीने बाद होने वाले थे रिटायर

Barabanki News: बाराबंकी में जिला जज की हार्ट अटैक से मौत, 3 महीने बाद होने वाले थे रिटायर
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Barabanki News : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज कुमार सिंह का बीते शुक्रवार सुबह तड़के हृदयगति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही न्यायायिक अधिकारियों व अधिवक्ताओं सहित कचहरी परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। 8 जुलाई 2024 से जिला जज बाराबंकी के तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे थे। करीब 60 वर्षीय पंकज सिंह 30 जून 2025 को रिटायर होने वाले थे।

मूल रूप से आजमगढ़ जिले के निवासी पंकज कुमार सिंह साल 2011 में एडीजे के तौर पर न्यायायिक सेवा में भर्ती हुए थे। बाराबंकी जिले में तैनाती से पहले वो उन्नाव, आगरा, लखनऊ, बुलंदशहर जनपदो में अपनी सेवाएं दे चुके थे। बताया जा रहा कि कचहरी के समाने स्थित आवास पर शुक्रवार सुबह तड़के करीब 3 बजे के बाद उन्हें सोते समय अचानक दिल का दौरा पड़ गया, जिससे उनकी मौत हो गई। उनकी आकस्मिक मृत्यु से सभी स्तब्ध रह गए। सुबह आवास पर उनके अंतिम दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धांजलि देने और अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई।

न्यायप्रिय और सामाजिक क्षेत्र में आत्मीय लगाव–अधिवक्ता


वरिष्ठ अधिवक्ता राजन सिंह ने बताया कि बतौर जिला जज पंकज कुमार सिंह अदालत में काम के प्रति काफी समर्पित भावना व बेहद संवेदन शील थे। सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेने के साथ न्याय के प्रति आत्मीय लगाव से कार्य करते थे कभी किसी का अहित नहीं सोचते थे। जिला बार अध्यक्ष हिसाल बारी किदवई ने गहरा दुःख प्रकट करते हुए बताया कि न्यायपालिका में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जो अपने कार्यों से एक अमिट छाप छोड़ जाते हैं। पंकज सिंह उन्हीं में से एक थे। न्याय के प्रति उनका समर्पण, वादकारियों और अधिवक्ताओं के प्रति संवेदनशीलता और निष्पक्ष फैसलों की प्रतिबद्धता ने उन्हें एक न्यायाधीश से बढ़कर, एक लोकप्रिय और प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया था।

लोगों ने प्रकट किया गहरा शोक


वहीं जिला जज पंकज सिंह के निधन की खबर सोशल मीडिया साइटों पर देख कर लोग दुःख प्रकट कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व बार अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा कहते हैं, हमारी 34 साल की प्रैक्टिस में ऐसा न्यायाधीश पहली बार देखा, जिसने न्याय की प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाया। वह हमेशा त्वरित न्याय देने में अग्रणी रहे और सभी के लिए सुलभ थे। वे केवल एक कुशल न्यायाधीश ही नही, बल्कि एक ऐसे मार्गदर्शक भी थे, जिनके पास कोई भी वकील, वादकारी या कर्मचारी बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकता था। उनके दरवाजे न्याय की तलाश में आने वाले हर व्यक्ति के लिए खुले रहते थे।

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