Chandauli: क्या एक महिला की इज़्ज़त अब सिर्फ़ ‘लाल कार्ड’ और ‘आवास’ जितनी रह गई है? जानिए क्या है पूरा मामला

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रिपोर्ट- विशाल गुप्ता

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Chandauli: चंदौली क्या एक महिला की इज़्ज़त इतनी सस्ती हो गई है कि उसे आवास और लाल कार्ड के बदले बिस्तर साझा करने का प्रस्ताव दिया जाए? क्या गरीब होना अब अपमान सहने की मजबूरी बन गया है?

नौगढ़ विकास खण्ड के रीठिया गांव की राजकुमारी ने जब संपूर्ण समाधान दिवस पर जिलाधिकारी को लिखित तहरीर दी, तो उम्मीद थी कि न्याय मिलेगा। (Chandauli) लेकिन 36 घंटे बीत जाने के बाद भी प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में है।

राजकुमारी ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान पति लालचंद बार-बार फोन कर उसे लालच देते रहे—”बिस्तर साझा करो, आवास मिलेगा, लाल कार्ड मिलेगा, पेंशन बनवा देंगे पति का इलाज भी करवा देंगे।” यह ऑडियो वायरल हो चुका है, लेकिन प्रशासन की कार्रवाई ठंडी पड़ी है। क्या यह चुप्पी सत्ता के संरक्षण का संकेत है?

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Chandauli: मैं गरीब हूँ साहेब, मगर इज़्ज़त प्यारी है राजकुमारी की गुहार

सोमवार को संपूर्ण समाधान दिवस पर जब डीएम चंद्रमोहन गर्ग और पुलिस क्षेत्राधिकारी नामेन्द्र के सामने राजकुमारी फूट-फूट कर रोई। राजकुमारी ने बताया पति दो साल पहले सड़क हादसे में दिव्यांग हो गया। (Chandauli) मेहनत-मजदूरी कर परिवार पाल रही महिला ने कहा, “हम गरीब हैं, मगर इज़्ज़त से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं।” यह शब्द प्रशासन की आत्मा को झकझोरने के लिए काफी होने चाहिए थे—पर शायद आत्मा अब संवेदनहीन हो चुकी है।

आश्वासन की घड़ी बीती, कार्रवाई की घड़ी कब आएगी?

सीओ नामेन्द्र ने सोमवार को ही आश्वाशन दिया था कि शाम तक प्रधानपति को गिरफ्तारी का वादा किया था। (Chandauli) लेकिन 36 घंटे बाद भी प्रधान खुलेआम घूम रहा है। उल्टा, महिला पर सुलह-समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। क्या यही है न्याय की परिभाषा?

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क्या यही है महिला सुरक्षा का दावा?

सीओ नामेन्द्र ने बताया कि —”मामले की जानकारी है, जांच चल रही है, अपराध साबित होने पर कार्रवाई होगी। ” लेकिन सवाल यह है जब महिला की तहरीर मौजूद है, तो अपराध साबित करने में देरी क्यों?

रीठिया ग्राम पंचायत की गलियों में अब एक ही सवाल गूंज रहा है क्या गरीब की इज़्ज़त का कोई मोल नहीं? क्या सत्ता के संरक्षण में अपराधी बचते रहेंगे? क्या महिला की आवाज़ दबा दी जाएगी?

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