Chandrayaan-3: चंद्रमा तक चंद्रयान-3 को पहुंचाने में उत्तराखंड के लाल ने निभाई अहम भूमिका, ऐसी रही जिंदगी

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Chandrayaan-3: भारत अब चांद पर पहुंच गया है। इसरो के इस चंद्रयान-3 मिशन को पूरा करने में उत्तराखंड के एक लाल ने अहम भूमिका निभाई। इनका नाम है वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह सिजवाली। राजेंद्र के बड़े भाई भी वैज्ञानिक हैं और अब उन्होंने अपने चोटे भाई के संघर्ष भर दिनों को दैनिक जागरण के साथ साझा किया।

वैज्ञानिक राजेंद्र सिंह सिजवाली के बड़े भाई डा. पूरन सिंह सिजवाली ने डा. पूरन सिंह सिजवाली वर्तमान में हैदराबाद में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत है। (Chandrayaan-3) हमेशा वह अपने छोटे भाई का हौसला बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा कि उनका छोटा भाई हमेशा से एक सफल वैज्ञानिक बनना चाहता था।

पूरन सिंह सिजवाली ने कहा कि एक समय अभाव का दौर था। अभावों में भी संघर्ष करना नहीं छोड़ा। आज भाई ने वह कर दिखाया जिसका वह सपना देखा करता था। पैसे की कमी के बाद भी जैसे-तैसे सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। संघर्ष के दौरान कभी ऐसा नहीं लगता था कि भाई एक दिन चंद्रयान की सफलता जैसा अनमोल उपहार देखा। मेरे छोटे भाई ने अपने अथक प्रयासों से चंद्रयान-3 मिशन को सफलतापूर्वक दक्षिण ध्रुव में पहुंचाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है।

बड़े भाई के लिए इससे बड़ा जीवन में कोई तोहफा नहीं हो सकता है। मैं और मेरा भाई राजेंद्र सिंह सिजवाली बहुत ही साधारण परिवार के है। हम परिवार में छह भाई बहन है। दो भाई और चार बहनें। मूलरूप से धौलादेवी ब्लाक के पुनौली गांव के रहने वाले हैं। पिताजी स्व. दिवान सिंह सिजवाली सेना में थे। जब मैं कक्षा तीन में पढ़ता था तो तब वह सेवानिवृत्त होकर आ गए थे। उस समय राजेंद्र पैदा भी नहीं हुआ था।

सेना की पेंशन भी बहुत कम थी। बड़ा परिवार होने के आर्थिक तंगी रहती थी। जैसे तैसे छात्रवृत्ति के जरिए मैंने अल्मोड़ा इंटर कॉलेज से हाईस्कूल किया। उसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन, पंतनगर से बायोटेकनालाजी में पीजी और जेएनयू से पीएचडी की। 1999 में यूएस चले गया।

मुझे प्रेरणा मानता था राजेंद्र

छोटा भाई को हमेशा मुझे ही अपनी प्रेरणा मानता था। वह बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि का था। मैंने उसको पढ़ने के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। वह मेरी तरह ही वैज्ञानिक बनना चाहता था तो उसे हमेशा मार्गदर्शन किया। उसने प्रारंभिक शिक्षा राजकीय इंटर कालेज द्यूनाथल से की। मेरी पत्नी गीता कोश्यारी सिजवाली ने भी हमेशा मदद की। हमेशा वह मेरे ही पदचिह्न में चला और अल्मोड़ा इंटर कॉलेज में पढ़ाई की।

राजेंद्र प्रोजेक्ट मैनेजर के पद थे तैनात

विपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वाराहाट से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग करने के बाद वर्ष 2005 में उनका चयन इसरो में हुआ। चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर के लिए प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर रहते हुए उन्होंने सेंसर के लिए पावर सिस्टम को विकसित करने में प्रमुख योगदान दिया। उनको जीवन में दीपिका जैसी आदर्श जीवन संगिनी मिली। उनके दो बच्चे भी हैं।

https://youtu.be/vc5lfhXAm60?si=mXUFXH3UpCRYnvcg

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