UP Nikay Chunav 2023: सपा नेता रईस शुक्ला को बगैर राय लिए भाजपा में शामिल कराने को लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से खफा कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी के दिलों की दूरियां मुख्यमंत्री की मौजूदगी में भी घट नहीं सकीं। निकाय चुनाव प्रचार के आखिरी दिन समर्थन जुटाने पहुंचे योगी के आगे नंदी ने डिप्टी सीएम का नाम तक नहीं लिया। मंच पर कोई बातचीत होते भी नहीं दिखी।
पुलिस लाइंस में पहुंचते ही मुख्यमंत्री का स्वागत करने के बाद औद्योगिक विकास मंत्री नंदी उनके ही साथ सभास्थल में मंच पर पहुंचे। यहां उनके और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच खिंचाव दूर से दिखाई दिया। (UP Nikay Chunav 2023) मौर्य, सीएम के दाहिनी ओर बैठे तो नंदी बायीं ओर। जब नंदी को संबोधन के लिए आमंत्रित किया गया तो नंदी ने मंचासीन प्रमुख नेताओं का नाम लिया और भाजपा उम्मीदवारों को जिताने की अपील भी की, लेकिन उप मुख्यमंत्री का नाम नहीं लिया।
वहीं, जब मौर्य की अगुवाई में सीएम को गदा भेंट की गई तो नंदी ही नहीं, पूर्व मेयर भी दूर ही खड़ी रहीं। ऐसा लगा कि किसी ने उनसे पास आने के लिए कहा भी नहीं। यही दृश्य फिर दोहराया, जब सीएम को भारी-भरकम माला पहनाई गई। तब भी नंदी पीछे हो गए या कर दिए गए।
हालांकि, बीच-बीच में जिले के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह जरूर दोनों को बारी-बारी से मनाते दिखाई दिए। मुख्यमंत्री के साथ नंदी की हंसी-ठिठोली भी खूब दिखाई दी। इन घटनाक्रमों ने न सिर्फ जनता का ध्यान खींचा, बल्कि चर्चा का मुद्दा भी बन गया। डिप्टी सीएम की ओर से प्रत्यक्ष दूरी जरूर नहीं दिखी। पूर्व महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी ने पार्टी के महापौर और पार्षद पद के उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे। हालांकि, उनके चेहरे पर टिकट न मिलने की टीस साफ दिखाई दी।
मंच नगर निगम चुनाव के मद्देनजर सजा था, लेकिन मुख्यमंत्री के अलावा एक-दो नेताओं को छोड़ दें तो ज्यादातर ने निवर्तमान मेयर अभिलाषा गुप्ता के कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाने से भी दूरी बनाए रखी। हर विकास कार्य को केंद्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ा गया। उप मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री को गदा भेंट की, लेकिन मंत्री नंदी एवं निवर्तमान मेयर अभिलाषा गुप्ता इस दौरान दूरी बनाए रहे। इतना ही नहीं, कार्यकर्ताओं की ओर से नेताओं को बड़ी माला पहनाई गई लेकिन नंदी माला के घेरे से बाहर ही रहे। इस तरह के कई अन्य मौके भी आए जिसे लेकर काफी चर्चा रही।
नाराजगी की यह है वजह
मंत्री नंदी, डिप्टी सीएम से दो कारणों से नाराज हैं। पहला, माना जा रहा है कि अभिलाषा गुप्ता का टिकट उन्होंने ही कटवाया और अपने विश्वासपात्र गणेश केशरवानी को मेयर प्रत्याशी बनवाया। इस कारण वह मेयर के रूप में हैट्रिक लगाने से चूक गईं। दूसरी वजह सपा नेता रईस शुक्ला को भाजपा में शामिल कराने को लेकर है। पिछले चुनाव में नंदी से ही शुक्ला को हार मिली थी। उन्हें बगैर पूछे भाजपा में शामिल कराने से नाराज नंदी ने बगैर किसी का नाम लिए कहा था कि कुछ लोग पार्टी को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की तरह चला रहे हैं। उन्होंने इसकी शिकायत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी की थी। बाद में, यहां आए प्रदेश अध्यक्ष उन्हें मनाने घर भी गए थे।
गणेश केशरवानी ने नहीं लिया नंदी-स्वतंत्र देव का नाम
भाजपा के महापौर पद के उम्मीदवार गणेश केसरवानी को टिकट दिलाने में बड़ी भूमिका डिप्टी सीएम की ही मानी जाती है। केशरवानी जब संबोधन करने पहुंचे तो मंत्री नंदी का तो नाम लिया ही नहीं, जिले के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का नाम लेना भी भूल गए। इसे लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसके राजनीतिक निहितार्थ भी निकाल रहे हैं।
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