Gorakhpur News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 30 जून को गोरखपुर पहुंचीं, जहां नगर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने उन्हें प्रतीकात्मक रूप से चांदी की चाभी भेंट की। (Gorakhpur News) इस चाभी को लेकर शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्या इसका कोई ऐतिहासिक महत्व है, या यह केवल एक औपचारिकता भर है? महापौर डॉ. श्रीवास्तव इस सम्मान को लेकर गौरवान्वित हैं, वहीं चाभी तैयार कराने वाले ‘परम्परा जेम्स एंड ज्वेलर्स’ के एमडी संजय अग्रवाल भी इसे एक ऐतिहासिक क्षण मानते हैं। उन्होंने राष्ट्रपति को भेंट की गई चाभी की एक प्रति अपने गोलघर स्थित शोरूम में भी लगवाई है और शहरभर में आभार प्रदर्शन हेतु होर्डिंग लगवा रहे हैं।

Gorakhpur News: क्या है इस परंपरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि?
गोरखपुर विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रभूषण अंकुर बताते हैं कि मेयर द्वारा किसी राष्ट्राध्यक्ष या विशिष्ट व्यक्ति को नगर की चाबी भेंट करने की परंपरा की शुरुआत मध्यकालीन यूरोप में हुई थी, विशेष रूप से 13वीं से 14वीं सदी के दौरान। (Gorakhpur News) उस समय नगरों को प्राचीरों से घेरा जाता था और उनके द्वारों को बंद करने के लिए चाबियों की आवश्यकता होती थी। जब कोई विशिष्ट अतिथि नगर में आता था, तो नगर प्रमुख (मेयर) उसे चाबी भेंट कर यह संदेश देता था कि नगर उसके लिए पूर्णतः सुरक्षित, सुलभ और स्वागत के लिए तत्पर है।
समय के साथ यह परंपरा प्रतीकात्मक सम्मान का रूप ले चुकी है। अब यह किसी अतिथि की उपलब्धियों, सेवाओं या विशिष्ट संबंधों की मान्यता के रूप में दी जाती है। (Gorakhpur News) अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देशों में इसे Key to the City कहा जाता है। नेल्सन मंडेला, मदर टेरेसा, माइकल जैक्सन, लता मंगेशकर जैसी हस्तियों को विभिन्न नगरों द्वारा यह सम्मान दिया जा चुका है।

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परम्परा जेम्स एंड ज्वेलर्स ने बनाई चांदी की चाबी
एमडी संजय अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रपति को भेंट की गई चाबी लगभग 80 ग्राम वजनी थी और उनके प्रतिष्ठान को इसे तैयार करने का अवसर मिला, यह उनके लिए अत्यंत गौरव की बात है।
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टेराकोटा गणेश प्रतिमा भी भेंट की गई
इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति को ‘एक जिला एक उत्पाद’ योजना के अंतर्गत टेराकोटा शिल्प से बनी गणेश जी की प्रतिमा भी भेंट की गई। यह कृति औरंगाबाद के शिल्पकार पन्नेलाल प्रजापति द्वारा तैयार की गई थी। पन्नेलाल ने बताया कि उपायुक्त उद्योग के निर्देश पर भगवान गणेश की 14 इंच लंबी चार प्रतिमाएं बनाई गईं, जिनमें से एक राष्ट्रपति को भेंट की गई। इसकी पैकेजिंग संगीता पांडेय और उनकी टीम द्वारा की गई। संगीता ने कहा कि राष्ट्रपति को उपहार देने की प्रक्रिया में उनका भी योगदान होना उनके लिए अत्यंत गर्व की बात है।














