India Water Dispute: भारत के खिलाफ बन रहा ‘वॉटर फ्रंट’? पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश ने भी खोला अंतरराष्ट्रीय मोर्चा

Facebook
X
WhatsApp

India Water Dispute: तीस्ता (Teesta) से लेकर सिंधु (Indus) तक पानी को लेकर भारत के दोनों पड़ोसी देशों पाकिस्तान (Pakistan) और बांग्लादेश (Bangladesh) की कूटनीतिक रणनीति में समानता दिखाई देने लगी है। बांग्लादेश के वाटर रिसोर्सेज मिनिस्टर शाहिद उद्दीन चौधरी अनी (Shahid Uddin Chowdhury Ani) ने भारत से गंगा जल संधि (Ganga Water Treaty) में गारंटी क्लॉज (Guarantee Clause) जोड़ने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने तीस्ता नदी (Teesta River) का पानी देने की मांग भी उठाई है। बांग्लादेश के मंत्री ने साफ कहा है कि अगर भारत उसकी मांगों को नहीं मानता है तो वह संयुक्त राष्ट्र (United Nations) समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करेगा।

Also Read –Salman Khan News: सलमान खान को आया हॉर्ट अटैक देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हुई खबर, सामने आया वीडियो

इससे पहले पाकिस्तान भी सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) तक पहुंच चुका है। ऐसे में दोनों देशों की भाषा और रणनीति में दिख रही समानता ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत के खिलाफ पानी के मुद्दे पर कोई साझा मोर्चा तैयार हो रहा है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से ऐसा कोई औपचारिक साझा राजनयिक मोर्चा सामने नहीं आया है।

India Water Dispute: बांग्लादेश ने मांगा गारंटी क्लॉज

बांग्लादेश के वाटर रिसोर्सेज मिनिस्टर शाहिद उद्दीन चौधरी अनी ने 19 अगस्त को ढाका (Dhaka) में आयोजित एक सेमिनार में गंगा जल संधि को लेकर अपनी मांग रखी। उन्होंने कहा कि जब गंगा जल संधि का नवीनीकरण (Renewal) होगा तो उसमें गारंटी क्लॉज जरूर शामिल किया जाना चाहिए।

Also Read –Sitapur News: माँग एक सिन्दूर दो , जनपद सीतापुर की महमूदाबाद कोतवाली में पति- पत्नी और आशिक पहुंचे

मंत्री ने बताया कि 1977 की संधि (1977 Agreement) में यह गारंटी क्लॉज मौजूद था, लेकिन 1996 में शेख हसीना (Sheikh Hasina) सरकार के दौरान हुई 30 साल की संधि में इसे हटा दिया गया। मौजूदा संधि दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है और इसमें कोई गारंटी क्लॉज नहीं है।

शाहिद उद्दीन चौधरी अनी ने गारंटी क्लॉज को बांग्लादेश का अधिकार बताते हुए कहा कि संधि के बिना आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं है।

पानी की न्यूनतम मात्रा चाहता है बांग्लादेश

गारंटी क्लॉज का मतलब यह है कि सूखे मौसम (Dry Season) में अगर फरक्का बराज (Farakka Barrage) पर पानी की उपलब्धता बेहद कम भी हो जाए तो बांग्लादेश को न्यूनतम तय मात्रा में पानी मिलता रहे।

1996 की संधि के मुताबिक, अगर फरक्का बराज पर पानी 70 हजार क्यूसेक (Cusecs) से कम है तो दोनों देशों के बीच पानी का बराबर बंटवारा होता है। पानी की उपलब्धता के लिहाज से 11 मार्च से 10 मई के बीच का समय सबसे संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि इस दौरान पानी की मात्रा सबसे कम रह जाती है।

इसी अवधि में दोनों देशों के बीच दस-दस दिन की बारी-बारी व्यवस्था तय की गई है, ताकि भारत और बांग्लादेश में खेती का काम प्रभावित न हो। अब बांग्लादेश चाहता है कि सबसे कम पानी वाले दौर में भी उसे एक तय न्यूनतम हिस्सा मिलता रहे, भले ही फरक्का बराज पर पानी की उपलब्धता कितनी भी कम क्यों न हो।

तीस्ता पर भी बांग्लादेश ने साफ किया रुख

बांग्लादेश के मंत्री ने तीस्ता नदी के पानी को लेकर भी भारत के सामने अपनी मांग रखी है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश तीस्ता के मुद्दे पर भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करना चाहता। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tariq Rahman) इस फाइल की समीक्षा कर रहे हैं।

मंत्री के मुताबिक, बांग्लादेश तीस्ता परियोजना (Teesta Project) को लागू करके रहेगा। यह परियोजना भारत के साथ मिलकर लागू हो या किसी दूसरी योजना के तहत, बांग्लादेश इसे आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगले महीने प्रधानमंत्री तारिक रहमान संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को मजबूती से उठाने वाले हैं।

UNECE वाटर कन्वेंशन का भी लिया सहारा

बांग्लादेश ने जून 2025 में यूएनईसीई वाटर कन्वेंशन (UNECE Water Convention) पर हस्ताक्षर किए थे। वह भारतीय उपमहाद्वीप का पहला देश है, जो इस कन्वेंशन का सदस्य बना है।

यह संयुक्त राष्ट्र यूरोप आर्थिक आयोग (United Nations Economic Commission for Europe) द्वारा समर्थित तकनीकी और सहयोगात्मक मंच है। इसके तहत सदस्य देशों को संयुक्त संस्थाएं (Joint Bodies), तकनीकी टीमें (Technical Teams) और वित्तीय सहायता (Financial Assistance) जैसी सुविधाएं मिलती हैं।

हालांकि, यह कोई ट्रिब्यूनल (Tribunal) नहीं है और भारत इसका सदस्य भी नहीं है। इसलिए इस कन्वेंशन का भारत पर कोई बाध्यकारी असर नहीं होता। इसके बावजूद बांग्लादेश इसे अपनी पानी से जुड़ी मांगों को अंतरराष्ट्रीय कानून (International Law) के तहत जायज ठहराने के लिए एक संस्थागत आधार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

पाकिस्तान भी पहुंचा था यूएन

बांग्लादेश से पहले पाकिस्तान भी पानी के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जा चुका है। अप्रैल 2026 में पाकिस्तान सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पहुंचा था।

इस्लामाबाद (Islamabad) ने इस मुद्दे को क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा (Regional Peace and Security) के लिए खतरा बताया था। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के इस मुद्दे को कोई खास तवज्जो नहीं मिली।

अब बांग्लादेश भी पानी के मुद्दे को लेकर लगभग इसी तरह की रणनीति अपनाता दिख रहा है। बांग्लादेश की ओर से भी साफ तौर पर कहा जा रहा है कि अगर भारत के साथ बातचीत से उसकी मांगें पूरी नहीं होती हैं तो वह संयुक्त राष्ट्र समेत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाएगा।

क्या भारत के खिलाफ बन रहा है साझा मोर्चा?

बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ समय से सहयोग और समन्वय बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच अभी पानी के मुद्दे पर कोई औपचारिक साझा राजनयिक मोर्चा (Diplomatic Front) सामने नहीं आया है। इसके बावजूद दोनों की भाषा और रणनीति में समानता साफ दिखाई दे रही है।

पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का रुख किया और अब बांग्लादेश गंगा जल संधि और तीस्ता के पानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जाने की बात कर रहा है। दोनों ही मामलों में पानी के मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत से आगे ले जाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति दिखाई दे रही है।

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत के खिलाफ पानी के मुद्दे पर दोनों पड़ोसी देशों के बीच किसी तरह का साझा रुख तैयार हो रहा है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई औपचारिक गठजोड़ या साझा मोर्चा सामने नहीं आया है। फिर भी दोनों देशों की बदलती रणनीति भारत के लिए सतर्क रहने वाली स्थिति मानी जा रही है।

The specified slider does not exist.

ताजा खबरें