Kanpur News: सपा विधायक इरफान सोलंकी को कानपुर जेल से 400 किलोमीटर दूर महाराजगंज की सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। पुलिस टीम कड़ी सुरक्षा घेरे में इरफान को लेकर कानपुर से महाराजगंज जेल के लिए रवाना हुई। जेल से निकलते वक्त मां और पत्नी को देख इरफान भावुक हो गए। प्लॉट में आगजनी, फर्जी आधार कार्ड से हवाई सफर और बांग्लादेशी नागरिक डॉ. रिजवान के परिवार को भारतीय होने का प्रमाणपत्र देने के मामले में सपा विधायक दो दिसंबर से जिला जेल में बंद हैं। (Kanpur News) जेल अधीक्षकों को शासन ने सख्त निर्देश दे रखे हैं कि विधायक को कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी। महाराजगंज जेल में भी उन्हें आम कैदियों या जेल मैनुअल का सख्ती से पालन करते हुए रखा जाएगा। आईजी और डीआईजी जेल इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।
सुरक्षा को खतरा बताकर मांगी थी जेल बदलने की अनुमति
13 दिसंबर को जिला कारागार कानपुर प्रशासन ने विशेष सचिव को पत्र भेजा था कि इरफान सोलंकी की जेल बदल दी जाए। जिला कारागार अधीक्षक बीडी पांडेय ने बताया कि जेल में सपा विधायक के मामले के कई आरोपी बंद हैं। बांग्लादेशी नागरिक, नूरी शौकत का पिता समेत तीन हिस्ट्रीशीटर भी इसी जेल में बंद हैं। (Kanpur News) इन पर आगजनी के मामले में इरफान का साथ देने का आरोप है। वहीं जेल में कई बड़े अपराधियों के साथ विधायक का बंद होना काफी संवेदनशील है, उनकी सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।
इरफान के शहर से दूर रहने से बदल सकते हैं सपा के समीकरण
आगजनी सहित कई मामलों में जेल में बंद चल रहे सपा विधायक इरफान सोलंकी को अब कानपुर से पूर्वांचल की जेल महाराजगंज में भेज दिया गया है। (Kanpur News) कहा जा रहा है कि ऐसे में उनकी गैर मौजूदगी से सपा की स्थानीय राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं। खासकर मुस्लिम राजनीति की गणित गड़बड़ा सकती है।

इरफान सोलंकी समाजवादी पार्टी से तीन बार से लगातार विधायक चुने जा रहे हैं। (Kanpur News) मोदी की लहर में भी सपा ने यहां से जीत हासिल किया। ऐसे में कहा जा रहा है कि अब आने वाले चुनाव के परिणाम भी दूसरे होंगे। दरअसल मुस्लिम मतदाताओं के बीच इरफान सोलंकी ने अपनी अलग रणनीति बनाई हुई है।
यह इस वजह से भी कहा जा सकता है, क्योंकि नगर निकाय चुनाव में सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में प्रत्याशी कौन होगा, इसका फैसला करने के लिए पार्टी ने इरफान को ही अधिकृत किया है। (Kanpur News) इसी वजह से तीन दिन पहले पार्टी का एक दल उनसे जेल में भी मिला था। अब यहां से दूर रहने पर विधायक का राजनीति गतिविधियों में सीधे दखल कम होने की वजह से असर पड़ सकता है। इसका फायदा दूसरे राजनीतिक दलों को हो सकता है।
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