Khalistani Flag in Golden Temple: महाराष्ट्र से लेकर पूरे देश में जब 26 जनवरी को पूरा भारत 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा था, उसी दौरान पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर (गोल्डन टेंपल) परिसर में खालिस्तानी झंडे लहराने और नारेबाजी की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। (Khalistani Flag in Golden Temple) यह घटना न सिर्फ शर्मनाक थी बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और बेहद गंभीर सवाल भी खड़ा कर गई है कि आखिर पंजाब में फिर से अलगाववादी गतिविधियां क्यों सिर उठा रही हैं?
इस पर कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब में खालिस्तान समर्थक तत्व पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। लंबे वक़्त से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पंजाब को फिर से अस्थिर करने के प्रयासों में जुटी हुई हैं।
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स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी झंडा?
गणतंत्र दिवस जैसे पवित्र राष्ट्रीय पर्व पर स्वर्ण मंदिर में खालिस्तानी झंडे दिखाया जाना बहुत ही गंभीर मामला है। (Khalistani Flag in Golden Temple) इसे लेकर सवाल यह खड़ा होता है कि इस दौरान पुलिस प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधक समिति क्या कर रही थी?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं तभी होती हैं जब स्थानीय स्तर पर ढुलमुल रवैया अपनाया जाता है। (Khalistani Flag in Golden Temple) यदि शुरुआत में ही कड़ी कार्रवाई होती तो अलगाववादी तत्वों का मनोबल बढ़ने का कोई भी मौका नहीं मिलता।
ISI की पुरानी नीति: ‘K2 प्रोग्राम’ फिर सक्रिय?
जानकारी के अनुसार पाकिस्तान ने दशकों पहले एक रणनीति अपनाई थी, जिसे ‘K2 पॉलिसी’ कहा जाता है यानी कि खालिस्तान और कश्मीर। आपको बता दे, जब पाकिस्तान युद्ध में भारत को हराने में विफल रहा, तब उसने आतंकवाद और अलगाववाद को हथियार बनाया। (Khalistani Flag in Golden Temple) कश्मीर में चरमपंथियों को भेजा गया और पंजाब में खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को हवा दी गई। अब आज एक बार फिर वही रणनीति नए रूप में लौटती साफ़ नज़र आ रही है।
होशियारपुर में RDX बरामद: बड़ा आतंकी नेटवर्क बेनकाब
पंजाब पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की हाल ही की कार्रवाई में होशियारपुर से 4 संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। (Khalistani Flag in Golden Temple) इनके पास से तकरीबन 2.5 किलो RDX, विदेशी पिस्टल और भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद हुआ है।
यह कोई छोटी घटना नहीं बल्कि एक बड़े आतंकी षड्यंत्र का बड़ा संकेत है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह विस्फोटक प्रयोग हो जाता तो भयंकर रूप से तबाही हो सकती थी।
रेलवे ट्रैक ब्लास्ट – ‘लोकल शरारत’ नहीं आतंक की साजिश
23 जनवरी को फतेहगढ़ साहिब जिले में रेलवे ट्रैक पर हुए धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों की गंभीर चिंता बढ़ा दी। (Khalistani Flag in Golden Temple) धमाके में करीब 4 फुट पटरी उखड़ गई और आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई। शुरुआत में इसे स्थानीय शरारत बताया गया, लेकिन बाद में NIA को भी जांच में शामिल किया गया। इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि यह साफ़ तौर से आतंकी साजिश थी, जिसका उद्येश्य गणतंत्र दिवस से पहले माहौल बिगाड़ना था।
ड्रोन से हथियारों की सप्लाई: बॉर्डर पर नया खतरा
पंजाब सीमा पर पाकिस्तान अब ड्रोन के माध्यम से हथियार, ड्रग्स, विदेशी करेंसी और विस्फोटक भेज रहा है। लेकिन, इन सब में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि बॉर्डर के पास कई ऊंची इमारतें बन गई हैं, जिनका प्रयोग वॉच टावर की तरह किया जा रहा है। जब BSF की पेट्रोलिंग हटती है, तब ड्रोन सीधे उन छतों पर सामान गिरा देते हैं और यह देश की सुरक्षा के लिए बहुत ही खतरनाक स्थिति है।
अमृतपाल सिंह केस: 35 दिन तक क्यों चला ऑपरेशन?
विशेषज्ञों ने अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी में देरी को भी प्रशासनिक चूक बताया। सवाल खड़ा होता है कि यदि सरकार सख्त होती तो 35 दिन नहीं, 35 मिनट में गिरफ्तारी संभव थी। (Khalistani Flag in Golden Temple) इंटरनेट बंद करना पड़ा, लाखों लोग प्रभावित हुए और सरकार को कई सोशल मीडिया अकाउंट बंद कराने पड़े। यह सब यह साफ़ करता है कि शुरुआत में कोई भी कड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
खालिस्तान समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू लगातार वीडियो जारी कर धमकियां देता रहा है। (Khalistani Flag in Golden Temple) उसने यहां तक दावा किया कि उसने राजनीतिक दलों को करोड़ों डॉलर की सहायता दी। यदि यह सच है, तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मामला बनता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ED और CBI को फॉरेंसिक ऑडिट के जरिए मनी ट्रेल की जांच करनी चाहिए।
क्या केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए?
पंजाब एक बॉर्डर स्टेट है और वहां कानून-व्यवस्था का मामला सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं रह गया है। (Khalistani Flag in Golden Temple) आज आतंकवाद, साइबर क्राइम और संगठित अपराध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रूप ले चुके हैं। ऐसे में यह बहस तेज हो गई है कि कानून व्यवस्था को सिर्फ राज्य का विषय मानना अब पर्याप्त नहीं। केंद्र को ज्यादा अधिकार मिलने चाहिए ताकि वक़्त रहते आतंकियों को कुचला जा सके।
पंजाब को सख्त कार्रवाई की आवश्यकता
विशेषज्ञों का बिलकुल स्पष्ट कहना है कि पंजाब में अलगाववादी गतिविधियों को शुरुआत में ही कुचलना होगा। वरना ISI का यह खेल और खतरनाक हो सकता है।
देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक है कि ड्रोन नेटवर्क पर जल्द से जल्द रोक लगे, बॉर्डर इलाकों की निगरानी बढ़े, आतंकी फंडिंग की जांच हो और स्लीपर सेल्स को खत्म किया जाए ताकि पंजाब को फिर से 80-90 के दौर में लौटने नहीं दिया जा सकता।














