Nitin Nabin New Team: भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में कई नए चेहरों को जगह मिली है। इनमें उत्तर प्रदेश से आने वाले दो मुस्लिम नेताओं डॉ. तारिक मंसूर और कुंवर बासित अली को मिली अहम जिम्मेदारी सबसे ज्यादा चर्चा में है।अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के इस फैसले को उसकी सामाजिक और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। उत्तर प्रदेश चुनाव में मुस्लिम वोट साधने में लगी बीजेपी को इन दो चेहरों से उम्मीद हो सकती है।
कौन हैं डॉ. तारिक मंसूर, बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष?
बीजेपी ने डॉ. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है। तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रह चुके हैं। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य भी मनोनीत किया था। पार्टी के भीतर उन्हें एक शिक्षित और प्रभावशाली मुस्लिम चेहरे के तौर पर देखा जाता है।
तारिक मंसूर खास तौर पर मुस्लिम समाज के बीच बीजेपी की पहुंच बढ़ाने की कोशिशों में सक्रिय रहे हैं। पसमांदा मुस्लिम समुदाय तक पार्टी की नीतियों और योजनाओं को पहुंचाने में भी उनकी भूमिका बताई जाती है। अब उन्हें राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर बीजेपी ने यह संकेत दिया है कि मुस्लिम समाज के एक वर्ग तक अपनी पहुंच को और मजबूत करने पर उसका जोर है।
कौन हैं कुंवर बासित अली?
दूसरे प्रमुख मुस्लिम चेहरे कुंवर बासित अली हैं। उन्हें बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान दी गई है। बासित अली लंबे समय से उत्तर प्रदेश में पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करते रहे हैं और प्रदेश बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष भी रहे हैं। बासित अली ने मुस्लिम समाज के बीच पार्टी की गतिविधियों को बढ़ाने के लिए कई अभियानों में भूमिका निभाई है। इनमें ‘कौमी चौपाल’, मदरसों और दरगाहों में योग कार्यक्रम और ‘मोदी मित्र’ जैसे अभियान शामिल हैं। बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान मुस्लिम समाज और महिलाओं को पार्टी से जोड़ने की रणनीति में भी बासित अली की भूमिका अहम बताई गई।
यूपी चुनाव से पहले बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग
बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश के इन दोनों मुस्लिम नेताओं को जिम्मेदारी मिलना राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और सभी प्रमुख दल अभी से अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने में जुटे हैं।समाजवादी पार्टी जहां PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण को चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बना रही है, वहीं बीजेपी के सामने इस सामाजिक समीकरण को चुनौती देने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में पार्टी की राष्ट्रीय टीम में दो मुस्लिम नेताओं को प्रमुख जिम्मेदारी देना उसके सामाजिक विस्तार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पसमांदा मुस्लिम समुदाय पर बीजेपी की नजर
बीजेपी लंबे समय से पसमांदा मुस्लिम समुदाय के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने पर जोर देती रही है। नई टीम में तारिक मंसूर और बासित अली को जगह मिलने से यह रणनीति और स्पष्ट होती दिखाई दे रही है। अब देखना होगा कि दोनों नेता उत्तर प्रदेश में पार्टी के मुस्लिम संपर्क अभियान को किस तरह आगे बढ़ाते हैं और आगामी विधानसभा चुनाव में इसका कितना राजनीतिक फायदा बीजेपी को मिलता है।









