UP Nikay Chunav: BJP के लिए बंजर साबित हुई 100 साल पुरानी नगरपालिका की सियासत, आसान नहीं यहां कमल खिलाना

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UP Nikay Chunav: टांडा नगरपालिका परिषद का चुनाव बीजेपी के लिए साख का चुनाव बन गया है. बीजेपी की सियासत के लिए यह नगरपालिका परिषद बंजर ही साबित हुई है. सौ साल पुरानी इस नगरपालिका परिषद में राम लहर से लेकर आज तक कभी भगवा नहीं फहरा है. टांडा निकाय चुनाव में कमल खिलाना भाजपा प्रत्याशी के सामने बड़ी चुनौती है. दरअसल टांडा अम्बेडकरनगर की सबसे पुरानी नगरपालिका परिषद है. इसका गठन 100 साल पहले हुआ था. बताया जा रहा है कि जिस समय अयोध्या को नगर पालिका बनाया गया था उसी समय टांडा को भी नगरपालिका का दर्जा मिला था.

सरयू नदी के किनारे बसे टांडा की अपनी एक अलग पहचान है. (UP Nikay Chunav) यह बुनकर बाहुल्य शहर है और कपड़ा बुनाई यहां की पहचान है. बुनकर नगरी टांडा हमेशा भाजपा की सियासत के लिए बंजर ही साबित हुआ है. 2017 विधानसभा चुनाव को छोड़ कर यहां कभी भी कमल नहीं खिला है. निकाय चुनाव की बात करें तो इस नगरपालिका का गठन हुए सौ साल से अधिक का समय बीत गया है, लेकिन यहां एक बार भी बीजेपी चुनाव नहीं जीती है. बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जो राम लहर चली तो उसके बाद जो चुनाव हुआ उसमे भी यहां बीजेपी को जीत नहीं मिल सकी.

कमल खिलाने के लिए हर कोशिश कर रही है बीजेपी

अम्बेडकरनगर में सियासत की नजर से महत्वपूर्ण टांडा नगर पालिका परिषद में बीजेपी कमल खिलाने के लिए हर कोशिश कर रही है. पार्टी के बड़े बड़े नेता मैदान में उतरे हैं. मुस्लिम वोटरों को रिझाने के लिए मुस्लिम नेता को चुनाव प्रभारी बनाया गया है. यही नहीं मुस्लिम मतदाताओं में फूट पड़े इसके लिए यहां अगड़ा और पिछड़ा कार्ड भी खेला जा रहा है. भाजपा नेता अगड़े जाति के मुस्लिम मतदाताओं को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. भाजपा ने कुछ मुस्लिम नेताओं को पार्टी में शामिल कराया है और उनको जिम्मेदारी भी दी है. भ्रष्टाचार और नगर का विकास चुनावी मुद्दा बनाया गया है. हालाकि इस चुनाव में भाजपाई हिंदू मुस्लिम करने से बच रहे हैं.

टांडा नगरपालिका में तकरीबन 71 हजार से अधिक मतदाता हैं, जिनमे मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है. इस बार के चुनाव भाजपा ने प्रदीप कुमार गुप्ता उर्फ शंकर गुप्ता को अपना प्रत्याशी बनाया है. सपा में टिकट बंटवारे के बाद बगावत हुई है कई पुराने सपाई बागी हो कर चुनाव लड़ रहे हैं और भाजपा इन्ही बागियों के सहारे अब यहां पहली बार कमल खिलाने का सपना देख रही है. चुनाव जीतने के लिए भाजपा हर जतन कर रही है लेकिन टांडा में कमल खिलाना रेगिस्तान में घास उगाने जैसा ही है. यहां भगवा फहराना बीजेपी प्रत्याशी के लिए बड़ी चुनौती है.

https://youtu.be/Fv-EGm2lDiA

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