RIP Mulayam Singh: मैं जाति का मेहतर हूं… फिर भी नेताजी अपना भाई कहते थे…

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इटावा. मैं जाति से मेहतर हूं, इसके बावजूद नेता जी मुलायम सिंह यादव मुझे अपना भाई तो कहते ही थे अधिकारियो से भी कहते थे मेरे भाई को कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए. उन्होंने मुझे सैफई गांव का प्रधान बनवाया. यह कहना है सैफई गांव के प्रधान रामफल बाल्मीकि का. आज जब मुलायम सिंह यादव अब इस दुनिया में नहीं हैं तो सैफई के प्रधान रामफल बाल्मीकि के पास नेता जी से जुड़ी हुई कई यादें हैं।

रामफल ने न्यूज 18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि ‘मैं इस गांव में पैदा हुआ हूं. नेता जी की बदौलत ही गांव का प्रधान हूं. नेता जी कुश्ती के बहुत बड़े शौकीन रहे. जब अखाड़े में कुश्ती लड़ने जाते थे तो वहां और भी पहलवान रहते थे. नेता जी हम लोगों से कहते थे ‘तुम नौजवान हो, तुम भी कुश्ती लड़ो, हम लोग आपस में कुश्ती लड़ते थे. हम लोग एक दूसरे की मालिश करते थे।

बाल्मीकि बताते हैं कि नेता जी ने कभी ऐसा नहीं जताया कि वह छोटी जति के हैं. उनके मन में छुआछूत जैसा कभी कुछ नहीं रहा. मैंने उनमे कभी भेदभाव नहीं देखा. वो कभी यह नहीं समझ पाए कि मैं मेहतर हूं. मैं आपको इमानदारी से बताना चाहता हूं कि मैं आज तो बुड्ढा हो गया हूं मेरी उम्र 70- 72 साल की हो गई है. मैं नौकरी से रिटायर भी हो गया हूं. उनके चरणों का आशीर्वाद हमें हमेशा मिला. कोई बात होती थी तो कहते थे कि रामफल मेरा छोटा भाई है. हमेशा अधिकारियों से भी कहते थे इसको देख लेना. हालांकि मैंने कभी नाजायज काम नहीं किए. कभी भी मैंने गलत फायदा नहीं लिया. नेता जी ने ट्रेनिंग दी है कि बहुत से लोग लालच देंगे, लेकिन रामफल इन लोगों से दूर रहना और सावधान रहना।

रामफल बोले कि मैं यकीनन कह रहा हूं मेरा गांव एक छोटा सा गांव था. चलने में बहुत दिक्कत थी. हमारे यहां भैसा गाड़ी और बैलगाड़ी से चलते थे. इतने रास्ते खराब थे कि लोग अपनी बेटियों की शादी भी यहां नहीं करते थे. लेकिन जैसे ही नेता जी मुख्यमंत्री बने सारे रोड जो आज आप देख रहे हैं उन्होंने बनवाया. उनका कहना है कि सैफई गांव बहुत ही गरीब गांव था पर लोग ईमानदार थे।

मुलायम को जिताने के लिए गांव वालों ने रखा उपवास
रामफल ने बताया नेताजी के पांच भाई और एक बहन है. उस समय ज्यादा जमीन भी नहीं थी. जब नेताजी चुनाव में उम्मीदवार बने तो सब लोगों ने फैसला लिया था कि नेता जी को हर हाल में जिताना है. ऐसे सभी लोगों ने पंचायत बुलाई गई. चौधरी महेंद्र सिंह उस वक्त प्रधान थे. सबसे कहा गया कि मुलायम सिंह चुनाव लड़ने जा रहे है, आप लोग क्या सहयोग करेंगे? मेरी मां शर्वती देवी हाथ जोड़कर खड़ी हुई और महेंद्र सिंह जी से बोली ददा हम भले ही एक टाइम रोटी खाएं लेकिन मुलायम सिंह को जिताएंगे। इसी पर तालियां बजा दी गई. सारे लोग बोले जो बात शर्वती ने कही सही है. सभी लोग चंदा दीजिए।

छुआछूत की कुप्रथा को मिटा दिया
1978 की बात है. नेता जी के भाई राजपाल यादव की शादी थी. नेताजी सहकारिता मंत्री थे. भारी भीड़ हुई. मेहतर लोग सोच रहे थे कि कहां बैठेंगे? नेता जी बोले रामफल यह लोग क्यों खड़े हैं? मैंने बोला जी साहब अभी खिलाते हैं. नेता जी सबको पूरी पंगत के साथ बैठाओ और किसी ने कुछ नहीं कहा. तब से ऐसी व्यवस्था हुई कि आज तक हमारे गांव में बुफे सिस्टम होता है. वहां किसी को नहीं कुछ पता होता कि कौन यादव, कौन पंडित, कौन ठाकुर और कौन मेहतर. सब एक साथ खाते हैं. सबको नेताजी का एक समान आशीर्वाद मिला. उन्होंने छुआछूत की कुप्रथा को मिटा दिया।

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