Swatantra Bhardwaj Controversy: दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े एक पुराने विवाद ने अब नया राजनीतिक रंग ले लिया है। कथित तौर पर एक पॉडकास्ट में हिंदुत्व कार्यकर्ता स्वतंत्र भारद्वाज ने दावा किया कि उन्होंने प्रदर्शनकारी निशु आजाद के पिता संजय के सिर पर हमला किया था, जिसके बाद उन्हें करीब 60 टांके लगे। भारद्वाज ने यह भी दावा किया कि उन पर हत्या के प्रयास यानी IPC की धारा 307 के तहत मामला बनता था, लेकिन उन्हें जेल नहीं जाना पड़ा।
पॉडकास्ट में स्वतंत्र भारद्वाज ने कथित तौर पर यह भी दावा किया कि घटना के बाद वह पूरी रात बाहर घूमते रहे और अगले दिन भी जेल नहीं गए। उन्होंने इसके पीछे राजनीतिक संपर्कों का संकेत देते हुए दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा और बिहार के मंत्री चिराग पासवान को अपना “बड़ा भाई” बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसी तरह संबोधित करते हुए अपने राजनीतिक समर्थन का दावा किया।
‘कपिल मिश्रा के फोन के बाद मुझे छोड़ दिया गया’
पॉडकास्ट में भारद्वाज ने दावा किया कि पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार नहीं किया और कथित तौर पर कपिल मिश्रा के फोन के बाद उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस कॉपी में उपलब्ध नहीं है और संबंधित नेताओं की ओर से इस आरोप पर प्रतिक्रिया को भी शामिल किया जाना जरूरी है।भारद्वाज ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें गिरफ्तार किया जाता तो धारा 307 लगनी चाहिए थी। उन्होंने घायल व्यक्ति की हालत और उसके सिर पर लगे टांकों का भी जिक्र किया। उन्होंने आगे अपने राजनीतिक संपर्कों का दावा करते हुए कपिल मिश्रा और चिराग पासवान को “बड़ा भाई” बताया और प्रधानमंत्री मोदी का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें भी उनका समर्थन हासिल है।
दिल्ली पुलिस पर भी गंभीर सवाल
पॉडकास्ट में भारद्वाज से जब प्रदर्शन के दौरान उनके हाथ में मौजूद डंडे को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कथित तौर पर दिल्ली पुलिस से अपने करीबी संबंधों का संकेत देते हुए पुलिस के जूते और डंडे जैसी चीजों का जिक्र किया। इन बयानों के सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई की गई थी और आरोपों पर उसका आधिकारिक पक्ष क्या है, इसे स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा।
निशु आजाद ने मांगा राहुल गांधी से इंसाफ
मामले में घायल संजय की बेटी निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर दावा किया कि घटना के बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उनकी शिकायत पर तत्काल FIR दर्ज नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देकर कार्रवाई टालती रही।
निशु ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की अपील की।
राहुल गांधी ने PM मोदी और अमित शाह से पूछा सवाल
निशु की अपील के बाद राहुल गांधी ने उनका वीडियो साझा करते हुए मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि कथित आरोपी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि एक दलित व्यक्ति का सिर फोड़ने का दावा करने वाला व्यक्ति खुलेआम घूम रहा है और सवाल उठाया कि क्या सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगी या उनका संरक्षण जारी रहेगा।
CJP ने भी दिल्ली पुलिस को घेरा
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से भी इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस और कपिल मिश्रा पर सवाल उठाए गए। CJP नेता सौरव दास ने दावा किया कि संजय के सिर की चोट इतनी गंभीर थी कि मामले में हत्या के प्रयास जैसी कठोर धारा पर विचार होना चाहिए था। दास ने कपिल मिश्रा की कथित भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि पुलिस कार्रवाई में किसी राजनीतिक हस्तक्षेप का दावा सही है, तो क्या इसकी जांच नहीं होनी चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी पॉडकास्ट में सामने आए कथित बयान को लेकर सरकार और पुलिस से सवाल किए। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर गंभीर हमला करने का दावा किया जा रहा है, उसका खुलेआम घूमना कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल: क्या दावों की होगी जांच?
स्वतंत्र भारद्वाज के पॉडकास्ट में किए गए कथित दावों ने अब पूरे मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। हालांकि, पॉडकास्ट में किया गया दावा अपने आप में घटना या राजनीतिक हस्तक्षेप का स्वतंत्र प्रमाण नहीं है। अब अहम सवाल यह है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में क्या कहती है, क्या मूल शिकायत और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर केस की दोबारा समीक्षा होगी और क्या कपिल मिश्रा या अन्य नेताओं पर लगाए गए कथित हस्तक्षेप के आरोपों की जांच की जाएगी।










