Trisha Remark Controversy: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेत्री तृषा कृष्णन (Trisha Krishnan) के नाम पर उठे विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। विवादित बयान मामले में करीब 90 मिनट की पुलिस पूछताछ के बाद डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने उनके साथ “आतंकवादी जैसा व्यवहार” किया और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश की।
उदयनिधि ने साफ कहा कि उन्होंने अभिनेत्री तृषा के खिलाफ कोई आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं की और उनके भाषण को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया।
पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब उदयनिधि स्टालिन कावेरी जल विवाद और किसानों के मुद्दे पर सरकार को घेर रहे थे। इसी दौरान भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने “तृषा… तृषा…” के नारे लगाने शुरू कर दिए। इन नारों को अभिनेत्री तृषा कृष्णन और टीवीके प्रमुख विजय के बीच लंबे समय से चल रही चर्चित अफवाहों से जोड़कर देखा गया।
इसी दौरान उदयनिधि ने मुस्कुराते हुए तमिल में एक टिप्पणी की। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह टिप्पणी दोहरे अर्थ (Double Meaning) वाली थी और सार्वजनिक मंच से एक महिला का अपमान करने वाली थी। बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला तेजी से राजनीतिक विवाद में बदल गया।
Trisha Remark Controversy: “100 बार” गिरफ्तार होने के लिए तैयार
तृषा पर की गई टिप्पणी से जुड़े विवाद के कारण हुई गिरफ्तारी के बाद रिहा होने पर, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (TVK) पर तीखा हमला बोला और पार्टी समर्थकों पर उनके खिलाफ झूठे आरोप फैलाने का आरोप लगाया।
द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) नेता ने कड़े शब्दों में बयान देते हुए कहा कि अगर किसानों के हक में खड़े होने के लिए उन्हें “100 बार” भी गिरफ्तार होना पड़े, तो वे इसके लिए तैयार हैं।
पुलिस पूछताछ के बाद बोले- ‘मैंने कुछ गलत नहीं कहा’
तंजावुर के सेंगिपट्टी पुलिस स्टेशन में पूछताछ के बाद मीडिया से बात करते हुए उदयनिधि ने कहा कि उनके पूरे भाषण का केंद्र केवल किसानों की समस्याएं और कावेरी जल विवाद था।
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उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में मंत्रियों के कामकाज पर उन्होंने तथ्यों के साथ सवाल उठाए, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय उनके खिलाफ केस दर्ज कराने में जुट गई।
उदयनिधि ने आरोप लगाया कि शिकायत में ऐसे शब्द जोड़ दिए गए जो उन्होंने कभी बोले ही नहीं।
उदयनिधि ने कहा, “मेरे भाषण में जो बातें मैंने कही ही नहीं, उन्हें कॉपी-पेस्ट करके जोड़ दिया गया। मैंने किसी के खिलाफ कोई गलत टिप्पणी नहीं की। मेरा पूरा भाषण किसानों के हितों और जल संकट पर था।”
डीएमके नेता ने कहा कि उन्होंने केवल मुख्यमंत्री से कावेरी जल विवाद पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी। उनके मुताबिक, पूरा विवाद असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है और सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबा रही है।
‘आतंकवादी जैसा व्यवहार किया गया’
उदयनिधि स्टालिन ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक आलोचना का जवाब देने के बजाय उन्हें अपराधी की तरह पेश किया गया।
उन्होंने कहा, “सरकार ने मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया जैसे मैं कोई आतंकवादी हूं। लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
अब आगे क्या?
विवादित टिप्पणी को लेकर पुलिस जांच जारी है। विपक्ष उदयनिधि के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है, जबकि डीएमके नेता लगातार दावा कर रहे हैं कि उन्होंने अभिनेत्री तृषा कृष्णन के खिलाफ कोई अशोभनीय टिप्पणी नहीं की और पूरे मामले को राजनीतिक रंग देकर पेश किया जा रहा है।
अब इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक टकराव दोनों तेज होने की संभावना है।








