यूपी विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का परिवारवाद सिर चढ़ कर बोलता था, लेकिन 2022 के चुनाव में हरदोई से भाजपा के परिवारवाद के आगे सपा का परिवारवाद ध्वस्त हो गया. हरदोई में सांडी से देवरानी, तो गोपामऊ से जेठानी चुनाव हारी हैं, तो भाजपा से बालामऊ सीट पर पहले से ही काबिज रामपाल वर्मा और सांडी विधानसभा सीट से उनके भतीजे प्रभाष कुमार ने जीत दर्ज कर भाजपा के परिवारवाद को बढ़ावा दिया है।
बता दें कि हरदोई जनपद में आठ विधानसभा सीटें हैं जिन पर भाजपा के प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया. जबकि हरदोई की सदर सीट पर भाजपा काफी अरसे बाद लौटी है. इसके अलावा हरदोई की सियासत में बड़ा मुकाम हासिल करने वाले स्व. परमाई लाल की बहुओं और बेटियों ने राजनीति को आगे बढ़ाया था, लेकिन इस बार उनके परिवार से कोई कुर्सी हासिल ना कर सका. परमाई लाल की छोटी बहू ऊषा वर्मा हरदोई से सांसद व मंत्री भी रही हैं, तो बड़ी बहू राजेश्वरी देवी विधायक और उनका बेटा अहिरोरी ब्लॉक प्रमुख रहा है. साथ ही उनकी बेटी अनीता वर्मा जिला पंचायत अध्यक्ष भी रही हैं. भाजपा ने चुनाव के सारे समीकरण ही बदल दिए और सपा की परिवारवाद की नीति को अपना लिया. भाजपा ने इस बार चाचा और भतीजे को मैदान में उतारकर जीत हासिल की है।
गोपामऊ विधानसभा से सपा की प्रत्याशी राजेश्वरी देवी 7998 मतों से भाजपा के प्रत्याशी श्याम प्रकाश से हार गईं. जबकि सांडी विधानसभा से सपा की प्रत्याशी ऊषा वर्मा 9811 मतों से भाजपा के प्रभाष कुमार से हार गईं. सपा की यह दोनों प्रत्याशी रिश्ते में जेठानी और देवरानी हैं
वहीं, भाजपा के प्रत्याशी बालामऊ सीट से रामपाल वर्मा ने 26244 मतों से जीत हासिल की है, तो सांडी से प्रभाष कुमार 9233 मतों से जीत मिली है. यह दोनों रिश्ते में चाचा और भतीजे हैं. कुल मिलाकर के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने समाजवादी पार्टी की परिवारवाद की नीति को बढ़ावा देकर अपनी बढ़त बना ली और एक बार फिर सूबे में भाजपा की सरकार बना रही है।









