अंबेडकरनगर: विधानसभा चुनाव में बेहतर कमाई करने की उम्मींद संजोए प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को कोरोना संक्रमण ने तगड़ा झटका दिया है। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने पहले 15 जनवरी और अब 22 जनवरी तक किसी भी प्रकार की चुनावी रैली, जनसभा, नुक्कड़ सभा, बाइक व रोड शो सहित भीड़ जुटाने वाले अन्य कार्यक्रमों पर रोक लगा दी है। इसके चलते ही चुनाव प्रचार सामग्री की छपायी को मिलने वाले ऑर्डर पर ब्रेक लग गया है। इतना ही नहीं जो पुराने ऑर्डर मिले भी थे, उन्हें भी कोरोना का हवाला देकर निरस्त किया जा रहा है।इससे जिले में संचालित करीब दो दर्जन छोटी बड़ी प्रिंटिंग प्रेस के संचालकों को एक करोड़ से अधिक के नुकसान की आशंका परेशान करने लगी है। आचार संहिता लागू होने से पहले बैनर, होल्डिंग, पोस्टर समेत अन्य कई प्रकार के चुनावी सामग्रियों के लिए लाखों के आर्डर मिलने से प्रिंटिंग प्रेस संचालक चुनावी सीजन में बेहतर कमाई की उम्मीद संजोए थे। आचार संहिता लागू होने से पहले ही विभिन्न प्रकार की चुनावी सामग्रियों के आर्डर भी एडवांस में प्रिंटिंग प्रेस को मिलने लगे थे।
इस बीच कोरोना संक्रमण के फैलते प्रकोप ने प्रिंटिंग प्रेस कारोबारियों की बेहतर कारोबार की उम्मीद को तगड़ा झटका दिया है।कोरोना के ग्रहण से पूरे वजूद पर संकट चुनावी प्रचार प्रसार के रूटीन तौर तरीकों पर 22 जनवरी तक लगी चुनाव आयोग की रोक के बाद से प्रिंटिंग प्रेसों को नया काम तो मिल नहीं रहा वरन पुराने आर्डर भी निरस्त होने लगे हैं। पटेलनगर स्थित रेनुका फ्लैश के निदेशक सप्पू वर्मा ने कहा कि कोरोना संकटकाल में लगभग दो वर्ष तक प्रिंटिंग प्रेस कारोबार पूरी तरह से ठप हो गया था। अब जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान कमाई होने की कुछ उम्मीद बंधी थी। अब एक बार फिर से कोरोना का ग्रहण संकट बन कर खड़ा हो गया है। यदि यह रोक आगे भी बढ़ी, तो इससे पूरा कारोबार ही चौपट हो जाएगा। अकबरपुर के प्रिंटिंग प्रेस संचालक राम आशीष ने भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि इस कारोबार को ही बंद करना पड़ेगा।
रिपोर्ट: राजकुमार मौर्य









