बिहार शराबबंदी कानून में होगा बदलाव? जानें कानून मंत्री ने दिया यह जवाब

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बिहार की नीतीश सरकार पिछले कुछ दिनों से शराबबंदी पर बुरी तरह घिरी हुई है. राज्य में जहरीली शराब से हुई मौत के मामले में विपक्ष लगातार उनपर निशाना साध रहा है. वहीं मद्य निषेध एवं आबकारी विभाग बिहार मद्य निषेध उत्पाद कानून-2016 में बदलाव करने जा रही है. हालांकि, राज्य के कानून मंत्री प्रमोद कुमार ने ऐसी किसी भी बात से इंकार कर दिया है. उन्होंने शुक्रवार को कहा कि उनके विभाग को अभी तक ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं मिला है. कानून मंत्री प्रमोद कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि विभाग के पास अब तक कोई प्रामणिक पेपर या प्रोपोजल विचार करने के लिए नहीं आया है. दूसरी ओर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव चैतन्य प्रसाद ने पुष्टि की है कि इस मुद्दे पर अंतर-विभागीय परामर्श आयोजित किया गया था. हालांकि, उन्होंने ब्योरा देने से मना कर दिया है.सूत्रों के मुताबिक, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा इसको लेकर संशोधन प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है. नए संशोधन में शराब पीने के अपराध में गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों को राहत मिल सकती है. शराब पीने के जुर्म में जेल भेजे जाने के बजाय मजिस्ट्रेट के सामने तय जुर्माना राशि को भरने के बाद छोड़े जाने का प्रावधान लागू किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक जुर्माना नहीं भरने की हालत में ही अभियुक्तों को जेल भेजा जाएगा.
हालांकि नए प्रावधान के मुताबिक शराब बनाने और बेचने वालों पर पहले की तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी. इस संशोधन प्रस्ताव पर फिलहाल मद्य निषेध विभाग के मंत्री से लेकर अधिकारी तक कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं. बिहार में इस बात की भी चर्चा है कि बिहार विधानमंडल के आगामी बजट सत्र में शराबबंदी कानून में संशोधन का प्रस्ताव सरकार सदन में ला सकती है. नई व्यवस्था का मकसद न्यायालय में लंबित मामलों को कम करने के अलावा बड़े शराब माफियाओं और तस्करों को जल्द से जल्द सजा दिलवाना है.बता दें कि बिहार में अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी कानून लागू है. इसके तहत शराब बेचने और खरीदने पर प्रतिबंध है, इसका उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है. मिली जानकारी के मुताबिक बिहार में अभी 30 से 40 प्रतिशत केस शराब पीने वालों के खिलाफ दर्ज है.

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