रायबरेली: आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक गलियारों में प्रदेश स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक दल बदलने वाले सीजनल नेताओं की होड़ लगी हुई है। इन्हीं की दुर्दशा का शिकार पार्टी का जमीनी अर्थात मूल कार्यकर्ता हो रहा है। इनकी दल बदल की राजनीति क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के बीच इस सर्द मौसम में चुनाव का तापमान बढ़ा रही हैं। शुरुआत से ही राष्ट्र की राजनीति से लेकर पंचायत की राजनीति तक अवसरवादी नेताओं की कोई कमी नहीं है वह जहां अपना निजी हित देखते हैं
वही शामिल होने चले जाते हैं। उनके चक्कर में उनका सपोर्ट करने वाले आम कार्यकर्ता को मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। पूरे 5 वर्ष सत्ता के मलाई चाटने के बाद नए दल में प्रवेश करना ऐसे नेताओं की अवसरवादिता को पूर्ण रूप से प्रदर्शित करता है। अब ऐसे में यह एक यक्ष प्रश्न उठना लाजमी हो जाता है कि ये दल बदल राजनीतिक मर्मज्ञ कैसे जनता के बीच जाएंगे और जनता को क्या समझाएंगे पिछली बार क्या समझाया था इस बार क्या समझाएंगे।
रिपोर्ट : राम सुमेर









