रिपोर्ट -मिथिलेश गुप्ता
UP News: वाराणसी। पारंपरिक हुनर को नई पहचान देने और कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार की विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 में जनपद चंदौली के 150 पारंपरिक कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना और उनके लिए स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना है।
इसी क्रम में वाराणसी के मंडुवाडीह स्थित के.एन. मैरिज लॉन में जिला उद्योग विभाग की ओर से प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 27 अक्टूबर 2026 को हुआ। कार्यक्रम का समापन सहायक आयुक्त सरिता ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान प्रशिक्षण के माध्यम से कारीगरों की कार्यक्षमता बढ़ाने, उनके व्यवसाय को मजबूत बनाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
UP News: हलवाई, नाई और राजमिस्त्री को मिलेगा प्रशिक्षण
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के अंतर्गत चंदौली जिले के कुल 150 लाभार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें हलवाई के 100, नाई के 25 और राजमिस्त्री के 25 लाभार्थी शामिल हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से इन पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े लोगों को अपने काम में दक्षता बढ़ाने और बदलते समय के अनुरूप आधुनिक कौशल अपनाने का अवसर मिलेगा।

कार्यक्रम का संचालन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के प्रौद्योगिकी विकास केंद्र, प्रक्रिया एवं उत्पाद विकास केंद्र (पीपीडीसी) तथा एनएसडीसी, एफआईसीएसआई और बीडब्ल्यूएसएससी के सहयोग से किया जा रहा है। इसका लक्ष्य कारीगरों को उनके पारंपरिक हुनर के साथ तकनीकी जानकारी देकर स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है।
सरकारी योजनाओं से स्वरोजगार स्थापित करने की दी जानकारी
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सहायक आयुक्त सरिता ने प्रशिक्षणार्थियों को विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के साथ-साथ विभिन्न स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (सीएम युवा), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक व्यंजन तथा एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) मार्जिन मनी योजना के बारे में विस्तार से बताया।
उन्होंने लाभार्थियों को इन योजनाओं के माध्यम से अपना व्यवसाय शुरू करने, सरकारी सहायता प्राप्त करने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने के अवसरों की जानकारी दी। साथ ही प्रशिक्षणार्थियों को अपने हुनर का उपयोग कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बैंक ऋण और उद्यम पंजीकरण की प्रक्रिया समझाई
प्रशिक्षण के दौरान रामचंद्र और अनीता शर्मा सहित संबंधित जिला समन्वयकों ने सैद्धांतिक, व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को उद्यम पंजीकरण, व्यवसाय के विभिन्न प्रकार, बैंक से ऋण प्राप्त करने की प्रक्रिया और स्वरोजगार शुरू करने के लिए जरूरी पहलुओं की जानकारी दी।
प्रशिक्षणार्थियों को बताया गया कि उचित योजना, तकनीकी दक्षता और सरकारी योजनाओं की जानकारी के जरिए वे अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा सकते हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि की संभावनाएं बढ़ेंगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकेंगे।
रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनेंगे कारीगर
कार्यक्रम में संबंधित विभाग के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में प्रशिक्षणार्थियों ने सहभागिता की। श्रीकांत, शशिकांत, ललित कुमार, मान्यती विश्वकर्मा, श्रेया और प्रिया सहित अन्य लोगों की उपस्थिति सराहनीय रही।
विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का प्रमुख उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों के हुनर को नई पहचान देना और उन्हें रोजगार तलाशने वाले व्यक्ति के बजाय रोजगार सृजन करने में सक्षम बनाना है। कौशल प्रशिक्षण और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी के माध्यम से लाभार्थियों को अपने व्यवसाय का विस्तार करने, आय के नए अवसर विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
यह पहल पारंपरिक व्यवसायों को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने और कारीगरों के आर्थिक भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।









