Durga Puja Pandal Stampede: कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल (Durga Puja Pandal) में शनिवार शाम खुशियों का माहौल अचानक मातम में बदल गया। महासप्तमी (Maha Saptami) के मौके पर पंडाल और उसके बाहर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई और बारिश से बचने के लिए लोग इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते पंडाल के अंदर भीड़ बढ़ती चली गई और इसी बीच लकड़ी से बना एक ढांचा अचानक गिर गया। इसके बाद वहां भगदड़ मच गई।
घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने चीख-पुकार और अफरा-तफरी का मंजर देखा। हालांकि, लकड़ी का ढांचा आखिर किस वजह से गिरा, इसकी जांच की जा रही है।
Durga Puja Pandal Stampede: बारिश से बचने के लिए भागे लोग और बढ़ती गई भीड़
घटना के एक चश्मदीद ने बताया कि महासप्तमी के दिन पंडाल और उसके बाहर काफी भीड़ थी। इसी दौरान तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से बचने के लिए लोग तेजी से इधर-उधर जाने लगे और पंडाल के अंदर भीड़ बढ़ती चली गई।
इसी बीच लकड़ी से बना एक ढांचा गिर गया और अचानक भगदड़ मच गई। चश्मदीद ने बताया कि भगदड़ के दौरान लोगों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी।
चश्मदीद के मुताबिक, उनकी बेटी और पोती भी इस घटना में घायल हुई हैं और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
डेढ़ घंटे से लगी थी लंबी कतार
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि प्रवेश द्वार पर करीब डेढ़ घंटे से लंबी कतार लगी हुई थी। बारिश होने की वजह से लोग जल्द से जल्द अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि जिस जगह पर श्रद्धालु मौजूद थे, वह काफी संकरी थी। बारिश, लंबी कतार और संकरी जगह के बीच अचानक स्थिति बिगड़ गई और भगदड़ मच गई।
प्रवेश द्वार संकरा, लाइटिंग भी कम होने का दावा
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने पंडाल के प्रवेश द्वार को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, प्रवेश द्वार बेहद संकरा था और वहां ठीक से लाइटिंग की भी व्यवस्था नहीं थी।
घटना में इस प्रत्यक्षदर्शी की बेटी और नातिन भी घायल हुई हैं और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वहीं, एक अन्य शख्स ने बताया कि भगदड़ के दौरान जो लोग बेहोश हो गए थे, उन्हें मोटरसाइकल से अस्पताल पहुंचाया गया।
जांच एसटीएफ को सौंपी गई
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के साथ कलकत्ता मेडिकल कॉलेज पहुंचे। वहां उन्होंने अस्पताल में भर्ती मरीजों की हालत का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों के लिए सर्वोत्तम उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। वहीं, इस पूरी घटना की जांच एसटीएफ (STF) को सौंप दी गई है।
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अब जांच के दौरान यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि आखिर पंडाल में अचानक ऐसी स्थिति कैसे बनी और लकड़ी का ढांचा किस वजह से गिरा।
लाउडस्पीकर की घोषणा से मची भगदड़
मुख्यमंत्री ने बताया कि मौके पर मौजूद अधिकारियों के मुताबिक, पूजा आयोजकों द्वारा लाउडस्पीकर (Loudspeaker) पर की गई एक घोषणा के कारण घटना हुई।
इसके साथ ही यह भी बताया गया कि निजी सुरक्षा गार्डों द्वारा सीटी बजाए जाने से पंडाल में प्रवेश का इंतजार कर रहे लोगों के बीच भगदड़ मच गई।
यानी घटना के पीछे बारिश और बढ़ती भीड़ के साथ-साथ लाउडस्पीकर पर हुई घोषणा और सुरक्षा गार्डों की सीटी बजने की स्थिति की भी जांच की जा रही है।
‘मेरी मां मेरी आंखों के सामने मर गई’
भगदड़ में बचे 25 वर्षीय सोनू पाल ने घटना के बाद जो बताया, वह बेहद दर्दनाक था। सोनू ने कहा कि उसने अपनी मां को अपनी आंखों के सामने मरते हुए देखा। रोते हुए सोनू ने कहा कि हो सकता है कि वह भी इस हादसे में नहीं बच पाता। घटना के बाद अस्पतालों में घायलों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा और परिवारों में अपनों को लेकर चिंता बढ़ गई।
समिति के पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा
दुर्गा पूजा पंडाल (Durga Puja Pandal) में हुई भगदड़ और अफरा-तफरी की घटना के बाद चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति के पदाधिकारियों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया।
समिति के महासचिव जयंत बनर्जी और कार्यकारिणी के तमाम पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। घटना के बाद से ही पूजा समिति और स्थानीय प्रबंधन पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे।
वहीं, आयोजकों को हिरासत में ले लिया गया है।
‘ध्वनि से परे’ थी थीम, उसी पंडाल में गूंजी चीख-पुकार
चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव समिति ने इस साल अपने पूजा पंडाल की थीम ‘आर्ब’ रखी थी। इसका भावार्थ ‘ध्वनि से परे’ बताया गया है।
इस अवधारणा के जरिए ध्वनि की परिचित सीमाओं से आगे बढ़कर मौन की गहराई को दर्शाने का प्रयास किया गया था। पंडाल को 360 डिग्री की अवधारणा के आधार पर तैयार किया गया था।
लेकिन शनिवार शाम इसी पंडाल में हालात अचानक बदल गए। जहां महासप्तमी पर मां दुर्गा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी थी, वहीं हादसे के बाद काफी देर तक चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।









