Khaleda Zia PM Modi: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया ने मंगलवार की सुबह अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही ढाका से लेकर देश के दूर-दराज इलाकों तक शोक की लहर दौड़ गई। समर्थकों की आंखें नम हैं और सियासी गलियारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। बांग्लादेश की राजनीति का एक बड़ा अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया। 80 वर्षीय खालिदा जिया लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं। लिवर और किडनी की समस्याओं के साथ-साथ उन्हें डायबिटीज, गठिया और आंखों से जुड़ी पुरानी बीमारी भी थी।
23 नवंबर को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें ढाका के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। (Khaleda Zia PM Modi) सीने में गंभीर संक्रमण के बाद उनके दिल और फेफड़ों में जटिलताएं बढ़ती चली गईं। तमाम कोशिशों के बावजूद मंगलवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली। इस बीच आइये भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वो एक बात जानते हैं जो खालिदा जिया की पार्टी BNP के दिल को छू गई थी और फिर उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताया था।
Also Read –India vs New Zealand: मध्यप्रदेश में तीसरा वनडे, छात्रों और दिव्यांग दर्शकों के लिए रियायती टिकटें
Khaleda Zia PM Modi: खालिदा जिया को पीएम मोदी का संदेश
जब खालिदा जिया की सेहत काफी बिगड़ गई थी तो उस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चिंता जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि खालिदा जिया ने बांग्लादेश के सार्वजनिक जीवन में वर्षों तक अहम योगदान दिया है। (Khaleda Zia PM Modi) पीएम मोदी ने उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी और यह भी कहा था कि भारत हर संभव सहायता देने के लिए तैयार है। इस संदेश को उस समय मानवीय संवेदना के रूप में देखा गया था।
बीएनपी ने जताया था आभार
प्रधानमंत्री मोदी के इस संदेश के बाद बीएनपी ने सार्वजनिक रूप से उनका आभार जताया था। (Khaleda Zia PM Modi) पार्टी ने एक्स पर लिखा था कि वह पीएम मोदी की सद्भावना, शुभकामनाओं और मदद की पेशकश की दिल से सराहना करती है। बीएनपी ने इसे पड़ोसी देशों के बीच मानवीय रिश्तों की मिसाल बताया था।
Also Read –Meerut News: नववर्ष के जश्न में नशा-हुड़दंग नहीं, नियम तोड़ने वाले जाएंगे सीधे हवालात: डीआईजी नैथानी
खालिदा जिया के बारे में
खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने देश की राजनीति में गहरी छाप छोड़ी। (Khaleda Zia PM Modi) उनके निधन के साथ ही बांग्लादेश ने एक अनुभवी नेता और संघर्षशील व्यक्तित्व को खो दिया है। आज पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि दे रहा है और उनके योगदान को याद कर रहा है। वहीं अस्पताल के बाहर समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ी, जहां लोग भावुक होकर उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।










