Nepal-Tibet Flood Disaster: 3 दिन बाद भी मलबे से निकल रहे शव, नेपाल में 469 की मौत…भारत के 288 नागरिक लापता

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Nepal-Tibet Flood Disaster: नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई भीषण बाढ़ को तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन तबाही का मंजर अभी भी खत्म नहीं हुआ है। मलबे के नीचे से लगातार शव बरामद हो रहे हैं और मरने वालों की संख्या अब 469 तक पहुंच चुकी है। सबसे बड़ी चिंता उन सैकड़ों लोगों को लेकर है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।

इस आपदा में करीब 30 देशों के नागरिक लापता बताए जा रहे हैं। इनमें भारत, अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूक्रेन समेत कई देशों के पर्यटक और मजदूर शामिल हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक करीब 1600 लोगों को हेलीकॉप्टर और जमीनी रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, लेकिन सैकड़ों लोग अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।

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Nepal-Tibet Flood Disaster: 1600 के करीब लोगों को बचाया गया

नेपाल पुलिस के अनुसार, राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। अब तक 796 लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 796 लोगों को जमीनी रास्ते से रेस्क्यू किया गया है।

सबसे ज्यादा 137 शव चितवन जिले से बरामद हुए हैं। इसके अलावा रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी जिलों से भी शव मिलने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में मलबे की तलाश कर रहे हैं और लापता लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

बाढ़ में तबाह पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं

इस भीषण बाढ़ (Flood) ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 35 पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें तबाह हो चुकी हैं। कई इलाकों का संपर्क टूट गया है, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आ रही हैं।

त्रिशूली और देवीघाट जैसी पनबिजली परियोजनाओं (Hydropower Projects) को भी इस आपदा में नुकसान पहुंचा है। बाढ़ और मलबे की वजह से नदी किनारे और पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई है।

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह पहुंचे नुवाकोट

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह गुरुवार को नुवाकोट जिले की बिदुर नगरपालिका पहुंचे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात का जायजा लिया। उन्होंने वहां चल रहे राहत और बचाव कार्य की स्थिति को भी देखा।

वहीं, तिब्बत की तरफ चीन के प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने ग्यीरोंग इलाके का दौरा किया। इस इलाके में चीनी सेना की एक विशेष टीम राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई है।

भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री

नेपाल में आई इस बड़ी आपदा के बीच भारत ने मदद का हाथ बढ़ाया है। भारत की तरफ से अब तक 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी जा चुकी है। इस राहत सामग्री में दवाइयां और खाने के पैकेट भी शामिल हैं।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने काठमांडू और बीजिंग में भारतीय दूतावासों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। इस आपदा के बीच अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। इनमें त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना के 63 मजदूर और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं।

288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अभी भी 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो सका है। इनमें 73 लोग एक पनबिजली परियोजना (Hydropower Project) में काम कर रहे थे, जबकि बाकी लोगों में कई ऐसे लोग शामिल हैं जो कैलाश मानसरोवर यात्रा (Kailash Mansarovar Yatra) पर गए हुए थे।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि भारत नेपाल को हर संभव मदद देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल के नेतृत्व से बातचीत की है और अधिकारियों को राहत सामग्री भेजने के निर्देश दिए हैं।

अमेरिका, ब्रिटेन और श्रीलंका ने भी किया मदद का ऐलान

नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई इस आपदा के बाद दूसरे देशों ने भी आर्थिक मदद की घोषणा की है। अमेरिका ने प्रभावित लोगों की मदद के लिए 5 लाख डॉलर देने का ऐलान किया है।

ब्रिटेन ने 50 लाख पाउंड की आर्थिक सहायता और आपातकालीन राहत टीमों को भेजने की घोषणा की है। इस हादसे में करीब 33 ब्रिटिश नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। श्रीलंका ने भी नेपाल की मदद के लिए 10 लाख डॉलर की आर्थिक सहायता देने की बात कही है।

आखिर कैसे आई इतनी बड़ी तबाही?

इस विनाशकारी घटना (Disaster) की शुरुआत बुधवार को नेपाल-चीन सीमा के पास लांगतांग लिरुंग पर्वत के करीब हुई। यहां एक ग्लेशियर (Glacier) का बड़ा हिस्सा अचानक टूट गया। इसके साथ ही पहाड़ की चट्टानें भी दरक गईं और भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे घाटी की तरफ बहने लगा।

यह पूरा मलबा पहले ल्हेंदे नदी में गिरा, जिससे नदी का बहाव कुछ समय के लिए रुक गया। लेकिन जैसे ही मलबे से बनी यह अस्थायी रुकावट टूटी, पानी और मलबे का एक बड़ा सैलाब आगे बढ़ गया।

यह सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणाली (Bhotekoshi and Trishuli River System) से होते हुए मध्य नेपाल के कई इलाकों में पहुंचा और अपने साथ भारी तबाही लेकर आया।

कुछ और ही निकला 4.4 तीव्रता का भूकंप

वहीं अमेरिकी भूगर्भ सर्वेक्षण एजेंसी यानी यूएसजीएस (USGS) ने घटना की जांच के बाद बताया कि शुरुआत में जिस हलचल को 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा गया था, वह असल में भूकंप नहीं था।

यूएसजीएस के मुताबिक, ग्लेशियर और पहाड़ के मलबे के टूटकर नीचे गिरने और उसके तेजी से बहाव की वजह से यह हलचल पैदा हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ ग्लेशियर ही नहीं टूटा था, बल्कि पहाड़ के नीचे की चट्टान का एक बड़ा हिस्सा भी टूटकर गिरा था। इसी वजह से इस घटना का असर इतना बड़ा हुआ और कई इलाकों में भारी तबाही फैल गई।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा सच
वहीं कनाडा की कैलगरी यूनिवर्सिटी (University of Calgary) के भूविज्ञानी डैन शुगर ने बताया कि सैटेलाइट तस्वीरें देखने के बाद साफ हो गया कि पहाड़ की चट्टान का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा था।

उनके अनुसार, यह चट्टानी हिस्सा ग्लेशियर के साथ नीचे आया और भारी मात्रा में बर्फ, पत्थर और मलबा घाटी की तरफ बह निकला। इसी वजह से नदी प्रणाली में रुकावट पैदा हुई और बाद में पानी और मलबे का बड़ा सैलाब कई इलाकों में फैल गया।

वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि इस घटना को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन (Climate Change) से जोड़ना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, गर्म होते मौसम की वजह से पहाड़ों की परमाफ्रॉस्ट परत (Permafrost Layer) कमजोर हो रही है, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।

नेपाल में 910 और तिब्बत में 558 लोग लापता

नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी (Disaster Management Agency) के अनुसार, अकेले नेपाल में 910 लोग लापता हैं। इनमें 113 नेपाली पर्यटक, सेना और पुलिस के 85 जवान और रसुवा जिले के 161 स्थानीय निवासी शामिल हैं। वहीं, तिब्बत की तरफ चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार 558 लोग लापता हैं। इनमें 260 विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

भारत के 288, अमेरिका के 90 नागरिक लापता

भारत के 288 नागरिकों से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है। इनमें 73 लोग पनबिजली परियोजना में काम कर रहे थे, जबकि बाकी में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए लोग भी शामिल हैं।

अमेरिका के विदेश विभाग के अनुसार, उसके 90 नागरिकों का भी अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। हालांकि, अब तक किसी अमेरिकी नागरिक की मौत की पुष्टि नहीं हुई है और तीन लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। मलेशिया के 51, यूक्रेन के 55, ऑस्ट्रेलिया के 39 और ब्रिटेन के 33 नागरिक भी लापता बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा कनाडा के 25, दक्षिण कोरिया के 9, सिंगापुर और जर्मनी के 8-8, रूस के 8, दक्षिण अफ्रीका और लातविया के 6-6, जापान और न्यूजीलैंड के 5-5, फ्रांस के 4 और बेल्जियम तथा स्पेन के 3-3 नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।

इटली, कजाकिस्तान, पुर्तगाल, आयरलैंड और नीदरलैंड के 2-2 नागरिक भी लापता लोगों की सूची में शामिल हैं। वहीं बेलारूस, फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, बुल्गारिया, स्विट्जरलैंड, सर्बिया और स्वीडन के एक-एक नागरिक का अब तक पता नहीं चल पाया है।

मलबे से बनी नई झील ने बढ़ाई चिंता

इस विनाशकारी बाढ़ के बाद एक नई और गंभीर चिंता सामने आई है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में चोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम पर भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया है। मलबे के जमा होने से वहां एक नई झील बन गई है।

चीनी अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार सुबह तक इस नई झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। अनुमान है कि अगले तीन दिनों में इसमें 30 लाख घन मीटर और पानी जमा हो सकता है।

अगर मलबे से बना यह प्राकृतिक बांध टूट जाता है तो नीचे बसे इलाकों में एक और बड़ी बाढ़ (Flood Alert) आ सकती है। नेपाल के जल विज्ञान विभाग ने लोगों से नदी किनारों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में हाई अलर्ट

नेपाल में आई तबाही के बाद भारत के उत्तर प्रदेश में भी अलर्ट जारी किया गया है। नेपाल से सटे महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में प्रशासन को हाई अलर्ट (High Alert) पर रखा गया है।

गंडक नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 32 सदस्यीय एसडीआरएफ टीम (SDRF Team) और 22 पीएसी जवानों को नेपाल भेजा गया है।

बलिया जिले के रसड़ा कस्बे की रहने वाली उषा देवी और उनके बेटे राहुल के भी लापता होने की खबर है। बताया गया है कि हादसे के वक्त दोनों अपनी दुकान पर मौजूद थे।

वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 गेट खोले गए

नेपाल और आसपास के इलाकों में पानी का बहाव बढ़ने के बाद बिहार के वाल्मीकिनगर बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। प्रशासन लगातार पानी के बढ़ते बहाव पर नजर बनाए हुए है।

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की 13 संवेदनशील ग्लेशियर झीलों (Glacial Lakes) पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी बड़ी घटना के खतरे को समय रहते पहचाना जा सके।

नेपाल और तिब्बत की सीमा पर आई इस तबाही के तीन दिन बाद भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। एक तरफ मलबे से लगातार शव बरामद हो रहे हैं और दूसरी तरफ करीब 30 देशों के नागरिकों के लापता होने से कई देशों की चिंता बढ़ गई है। राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन नई झील और उसके टूटने की आशंका ने पहले से ही तबाही झेल रहे इलाकों के सामने एक और बड़े खतरे की घंटी बजा दी है।

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