Supreme Court: CEC ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग को नोटिस जारी !

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Supreme Court: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अहम कदम उठाया। कोर्ट ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस उन याचिकाओं पर दिया गया है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने आयोग के कई फैसले दूसरे चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना अकेले लिए।

इसके साथ ही अदालत ने याचिका दायर करने वालों को चुनाव आयोग के जवाब पर अपनी बात रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। इन याचिकाओं में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले को ‘वोट चोरी’ के आरोपों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं की याचिकाएं भी शामिल

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस भी जारी किया है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग वाली याचिकाओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की याचिकाएं भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी है। अब इस मामले को 17 नवंबर को सूचीबद्ध किए जाने की उम्मीद है।

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट का यह कदम चुनाव आयोग की ओर से हलफनामा दाखिल किए जाने के एक दिन बाद आया है। आयोग ने अपने जवाब में देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया का बचाव किया है। उसका कहना है कि इस प्रक्रिया से जुड़े सभी फैसले आयोग के तीनों सदस्यों ने मिलकर और सर्वसम्मति से लिए हैं। आयोग ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किए जाने के आरोपों को भी खारिज किया है।

248 पन्नों के हलफनामे में आरोपों को बताया गलत

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल 248 पन्नों के जवाब में याचिकाओं में लगाए गए आरोपों को गलतफहमी पर आधारित बताया है। आयोग ने अदालत से इन याचिकाओं को शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने की मांग की है।

हलफनामे के मुताबिक, 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए SIR संबंधी आदेश आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे। आयोग ने कहा कि ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यकाल से जुड़े 2023 के कानून की धारा 18 के तहत लिए गए।

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में यह भी स्पष्ट किया कि किसी फाइल पर काम करते समय किसी चुनाव आयुक्त की ओर से कोई सुझाव देना, टिप्पणी करना या सवाल पूछना आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।

आयोग के अनुसार, फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती है, फिर दूसरे आयुक्त के पास और आखिर में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास पहुंचती है। मंजूर किए गए फैसलों पर तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर होते हैं।

आयोग ने यह भी बताया कि अगर किसी जरूरी आदेश को जारी करना हो और सभी सदस्य एक ही जगह मौजूद न हों, तो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मंजूरी ली जा सकती है। बाद में इस मंजूरी को संबंधित फाइल में दर्ज कर दिया जाता है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाब पर अपना पक्ष रखने के लिए 10 दिन का समय दिया है। मामले में अगली सुनवाई 17 नवंबर को होने की उम्मीद है।

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