Swachh Bharat Mission: जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में गांधी जयंती के दिन “स्वच्छ भारत मिशन” की शुरुआत की थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक सफाई अभियान देश की कमाई का जरिया भी बन सकता है। आज, करीब एक दशक बाद, यह पहल न केवल देश की सूरत बदल रही है बल्कि कचरे से करोड़ों रुपये की कमाई भी करवा रही है। जी हां जिस कूड़े को कभी बेकार समझा जाता था, उसी से अब सरकार ने अरबों का राजस्व अर्जित किया है।
Swachh Bharat Mission: कूड़े से 4085 करोड़ रुपये की कमाई
केंद्र सरकार की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 से चल रहे स्पेशल कैंपेन 5.0 के दौरान अब तक लगभग 9.87 लाख जगहों पर सफाई अभियान चलाए गए हैं। इस अभियान के तहत जमा हुए कचरे और कबाड़ को बेचकर 4085 करोड़ रुपये की कमाई हुई है। (Swachh Bharat Mission) केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने एक्स पोस्ट में बताया कि यह सफाई सिर्फ झाड़ू लगाने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इससे सरकारी दफ्तरों और जमीनों को भी नया जीवन मिला है।
पुरानी फाइलें बनीं डिजिटल
अभियान के दौरान सरकारी विभागों में पड़ी 53.12 लाख पुरानी फाइलों की समीक्षा की गई। (Swachh Bharat Mission) इनमें से 28.44 लाख फाइलों को डिजिटल रूप में बदलकर पुराने कागज कबाड़ में बेच दिए गए। इससे न केवल जगह खाली हुई बल्कि सरकारी कामकाज भी तेज और पारदर्शी हुआ।
231.75 लाख वर्ग फुट जमीन वापस मिली
सफाई अभियान का सबसे बड़ा फायदा जमीन खाली कराने के रूप में सामने आया। देशभर में कई सरकारी परिसरों और दफ्तरों में वर्षों से जमा कचरे और पुराने सामान को हटाने के बाद 231.75 लाख वर्ग फुट जमीन खाली करवाई गई। अब इन जगहों पर ग्रीन स्पेस, पार्क और सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
शौचालयों और कचरा प्रबंधन में भी तेजी
स्वच्छ भारत मिशन के तहत अब तक 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाए जा चुके हैं। (Swachh Bharat Mission) वहीं, पुराने 2492 लाख टन कचरे में से 1437 लाख टन का निपटारा भी कर दिया गया है। इससे न सिर्फ शहरों की सफाई बेहतर हुई है बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है।
स्वच्छ भारत: अब मिशन से आगे, आंदोलन बन चुका
आज “स्वच्छ भारत मिशन” सिर्फ सरकारी योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलन बन चुका है। (Swachh Bharat Mission) यह अभियान दिखा रहा है कि जब सफाई को आदत बना लिया जाए, तो वही कचरा भी कमाई का जरिया बन सकता है। मोदी सरकार का यह मिशन अब एक नई दिशा में बढ़ रहा है, जहां स्वच्छता ही समृद्धि का प्रतीक बन चुकी है।










