दिल्ली में वायु प्रदूषण का खतरनाक असर, 75 फीसदी बच्चों में सामने आई सांस लेने की दिक्कत

Facebook
X
WhatsApp

देश की राजधानी दिल्‍ली का प्रदूषण कंट्रोल करने के लिए राज्य सरकार लगतार प्रयास कर रही है लेकिन बहुत कारगर नहीं साबित हो रहा है। प्रदूषण की वजह से लोगों का सांस लेना दिन पर दिन दूभर होता जा रहा है। वहीं हाल ही में बच्‍चों के स्‍वास्‍थ पर दिल्‍ली के प्रदूषण के असर को लेकर एक सर्वेक्षण किया जिसमें डरा देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि दिल्‍ली के 75 फीसदी बच्चों में सांस लेने की दिक्कत हो रही है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली की हवा में प्रमुख प्रदूषक पीएम2.5 की उच्च सांद्रता है। जो दिल्लीवासियों, विशेषकर बच्चों को सांसऔर हृदय रोगों संबंधी की ओर धकेल रहा है। दिल्‍ली 413 बच्चों पर स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया गया, जिसमें से 75.4% ने सांस फूलने की शिकायत की, 24.2% ने आंखों में खुजली की शिकायत की, 22.3% ने नियमित रूप से छींकने या नाक बहने की शिकायत की और 20.9% बच्चों ने सुबह खांसी की शिकायत की। इस सर्वे में जिन बच्‍चों पर किया गया है उनकी उम्र 14-17 साल के बीच है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें से कुछ हेवी मेटल्‍स मनुष्‍य के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं और इनके नियमित संपर्क में आने के कारण आने वाले समय में इसके घातक स्‍वास्‍थ्‍य परिणाम हो सकते हैं। वायु में कैडमियम और आर्सेनिक की बढ़ी हुई मात्रा ने दिल्‍ली के लोगों को कैंसर, गुर्दे की समस्याओं और हाईब्लड प्रेशर, शुर और हार्ट संबंधी रोगों के हाई रिस्‍क में डाल दिया है।

शोधकर्ताओं ने heavy metals को पीएम 2.5 के एक प्रमुख घटक के रूप में भी पहचाना जिसके परिणामस्वरूप संभावित स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। अक्टूबर 2019 में दिल्‍ली के पीएम 2.5 (particles less than 2.5 micrometres in diameter) जिंक की सांद्रता (concentration) 379 एनजी / एम 3 (नैनोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हवा) थी। जो सितंबर 2020 में, यह बढ़कर 615 एनजी/एम3 (नैनोग्राम प्रति घन मीटर हवा) हो गया। इसी तरह, दिल्ली की हवा में लेड की मात्रा 2019 में 233 एनजी/एम3 (हवा का नैनोग्राम प्रति घन मीटर) थी, जो 2020 में बढ़कर 406 एनजी/एम3 (हवा का नैनोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर) हो गई, जिसमें 3 एनजी/ एम3 था।

The specified slider does not exist.

ताजा खबरें