बाराबंकी : कोरोना गाइड लाइन का पालन करने के बावजूद पुलिस बरसा रही डंडे, डॉक्टर भी नहीं कर रहे इलाज

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भारत में बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामले देश और दुनिया के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। यही वजह है कि इस वक्‍त पूरी दुनिया का ध्‍यान भारत की तरफ है। इस बीच रामनगर बाराबंकी पूरे देश में महामारी के चलते नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिससे सरकार के साथ-साथ डॉक्टर पुलिसकर्मी से जनता का विश्वास समाप्त होता जा रहा है। इस समय पूरे क्षेत्र में महामारी का प्रकोप चल रहा है। कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नियमों का पूर्ण रूप से पालन नहीं कर रहा है। जिससे जनता में आक्रोश व्याप्त है. लोगों का कहना है की सरकार द्वारा जो दिशा निर्देश दिए गए हैं उनका हम लोग पालन कर रहे हैं फिर भी पुलिस वाले हम लोगों को परेशान करते हैं समय से पहले दुकाने आदि बंद कर आना तथा सड़कों पर जरूरी काम से आने जाने वाले लोगों पर डंडा बरसाना कार्य निहायत गलत है क्योंकि गवई गांव के लोग अपनी आवश्यकता के लिए कस्बों और शहरों तक आते जाते रहते हैं क्योंकि उन्हें दवा आदि चीजों की जरूरत होती है यह लोग मार्क्स और हेलमेट लगाकर ही वाहनों से निकलते हैं फिर भी पुलिसकर्मी उन्हें परेशान करती है आम लोगों का कहना है की इस तरह अगर हम लोग सताए जाएंगे तो घर का कार्य किस प्रकार चल पाएगा वहीं पर शासन प्रशासन द्वारा यह आदेश दिया जाता है की स्वास्थ्य कर्मी गरीब असहाय अस्वस्थ व्यक्तियों की मदद करेंगे लेकिन जब कोई व्यक्ति सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए जाता है तो उसे डॉक्टर देखना भी मुनासिब नहीं समझते तो वह व्यक्ति इलाज कराने के लिए कहां जाए अगर प्राइवेट अस्पताल में जाता है तो उसे मोटी रकम अदा करना पड़ेगा ऐसे व्यक्तियों के पास इलाज के लिए पैसा कहां से आए जिससे अपने लोगों का इलाज कर सकें क्योंकि 2 वर्षों से महामारी का प्रकोप चल रहा है लोग घरों में बैठे हुए हैं जिससे आमदनी का स्रोत बंद हो गया है सबसे ज्यादा इस समय मजदूर तबके के लोग बहुत परेशान हैं क्योंकि वह लोग प्रतिदिन मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करते थे लेकिन इस समय कहीं भी कोई काम उन्हें नहीं मिल रहा है इस समय व्यापारी से लेकर वकील मजदूर प्राइवेट शिक्षक रिक्शा चालक टेंपो चालक होटल चालक सभी लोग परेशान हैं क्योंकि कोरोना के चलते पूरे क्षेत्र में सभी प्रतिष्ठान बंद चल रहे हैं क्षेत्रीय जनता का कहना है की पुलिसकर्मी व स्वास्थ्य कर्मी अपने कर्तव्य नियमों को भूलकर मनमानी कर रहे हैं क्योंकि पुलिसकर्मी को जनता की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है तथा डॉक्टरों को लोग धरती का भगवान मानते थे। लेकिन आज मरीज को देखकर उनका ह्रदय नहीं पिघलता है की हमारा कर्तव्य क्या है और जब हम विभाग में नौकरी करने आए थे तो हमें किस बात के लिए शपथ दिलाया गया था मेरा कर्तव्य क्या है और मैं इस महामारी के समय क्या कर रहा हूं अगर यह जिम्मेदार व्यक्ति इसी तरह कार्य करते रहेंगे तो ईश्वर इन्हें कभी माफ नहीं करेगा तथा अपने परिवार के साथ इन्हें जनता के दुख दर्द को भोगना ही होगा।

आपको बता दे कि भारत फिलहाल इस महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है लेकिन अभी से ही इसकी तीसरी लहर आने की आशंका भी जताई जाने लगी है। ज्‍यादातर जानकार इस आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं कि भारत में तीसरी लहर आएगी। अधिकतर जानकारों का कहना है कि भारत में कोरोना महामारी की तीसरी लहर इस वर्ष सितंबर के बाद आ सकती है। सफदरजंग अस्‍पताल में कम्‍यूनिटी मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रोफेसर और डॉक्‍टर जुगल किशोर का कहना है कि भारत में महामारी की जिस तीसरी लहर के आने की आशंका जताई जा रही है वो मुख्‍य रूप से तीन बातों पर निर्भर करती है।

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