पंजाब में चुनावी रैलियों पर एक हफ्ता और रोक बढ़ सकती है। आयोग की तरफ से जल्द ही इसका औपचारिक ऐलान करने की तैयारी है। इस संबंध में दिल्ली में आयोग की मीटिंग चल रही है। पंजाब में चुनाव की घोषणा के बाद कोरोना ब्लास्ट हो हो चुका है। 8 जनवरी को चुनाव की घोषणा के बाद एक हफ्ते यानी 7 दिन में राज्य में कोरोना के 32 हजार 200 केस मिले। 66 कोरोना मरीजों ने दम तोड़़ दिया। एक्टिव केस 22 हजार बढ़ गए। पंजाब में 21 जनवरी से नामांकन शुरू होना है। 14 फरवरी को वोटिंग होनी हैं।
यह हालात तब हैं, जबकि पंजाब में चुनावी रैलियों पर पूरी तरह से पाबंदी लगी है। अगर चुनावी रैलियां हुई तो फिर पंजाब में कोरोना का कहर मचना तय है। चुनाव आयोग की पाबंदी की समयसीमा आज खत्म हो रही है। ऐसे में बड़ी चुनावी रैलियों से फिलहाल रोक हटना संभव नहीं है। चुनाव आयोग आज इस पर अंतिम फैसला ले लेगा।
चुनाव आयोग ने 8 जनवरी को पंजाब चुनाव की घोषणा की थी। उस दिन पंजाब में कोरोना के 3,643 केस मिले थे और 2 लोगों ने दम तोड़ दिया था। 14 जनवरी को पंजाब में 7,642 पॉजिटिव केस मिले, 21 लोगों ने दम तोड़ दिया। यह हालात देख स्पष्ट है कि अगर चुनाव आयोग 8 जनवरी तक के हालात को खतरनाक मान रहा था तो अब तो पंजाब के हालात बहुत बदतर हो चुके हैं।
पंजाब में कोरोना का खतरा किस कदर बढ़ चुका है, इसका अंदाजा हर रोज जिलों में मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या से लगा सकते हैं। पंजाब में अभी तक पटियाला सबसे आगे था, लेकिन 634 केस मिलने के बावजूद यह जिला चौथे नंबर पर है। अब पहले नंबर पर 1808 केस के साथ लुधियाना आ चुका है। यहां पॉजिटिविटी रेट भी 43.17% रहा। दूसरे नंबर पर 1,215 केस के साथ मोहाली और तीसरे पर 695 केस के साथ जालंधर हैं।
पंजाब में कोरोना के लिहाज से सरकार की तैयारियों की धज्जियां उड़कर रह गई हैं। शुक्रवार को 24 घंटे में 21 मरीजों की मौत हो गई। सबसे ज्यादा 7 मरीजों की मौत लुधियाना में हुई। इसके अलावा जालंधर में 4, होशियारपुर और पटियाला में 2-2 और अमृतसर, बरनाला, गुरदासपुर, मोगा, संगरूर और तरनतारन में एक-एक मरीज ने दम तोड़ दिया। सबसे खतरनाक बात यह है कि पंजाब में 637 मरीज लाइफ सेविंग सपोर्ट पर पहुंच चुके हैं। इनमें 485 ऑक्सीजन, 122 ICU और 30 वेंटिलेटर पर हैं।









