Loksabha Election 2024 : कृष्ण की नगरी मथुरा लोकसभा सीट पर इस बार किसका चलेगा जादू ?

Loksabha Election 2024 : कृष्ण की नगरी मथुरा लोकसभा सीट पर इस बार किसका चलेगा जादू ?
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Loksabha Election 2024 : यूपी के मथुरा लोकसभा सीट का मिजाज भगवान श्रीकृष्ण की तरह चंचल रहा है। यहां का सियासी हवा कभी यह देश के साथ तो कभी विपरीत में बहती है। ब्रजवासियों ने बड़े नामों को संसद भेजा लेकिन कई बार ऐसे लोगों को निराश भी किया है। इसके अलावा बाहरी उम्मीदवारों के भी सिर पर जीत का सेहरा बांधा है। चाहे वह मौजूदा सांसद हेमा मालिनी हों या उनसे पहले जयंत चौधरी। मनीराम बागड़ी तो इतिहास में दर्ज हैं। मथुरा लोकसभा सीट बहुत ही दिलदार रही है। मथुरा लोकसभा सीट को शुरुआती दौर से ही जाट बहुल माना जाता है। इस सीट पर अब तक चुने गए 17 सांसदों में से 14 जाट समुदाय से आते हैं। हालांकि यहां से जाट बिरादरी का प्रतिनिधित्व करने वाली आरएलडी कभी इसे अपना किला नहीं बना सकी है।

Loksabha Election 2024 : भाजपा ने हेमा मालिनी पर तीसरी बार लगाया दाव

Loksabha Election 2024: कृष्ण की नगरी मथुरा लोकसभा सीट पर इस बार किसका चलेगा जादू? जानें यहां का समीकरण

यह बात और है कि यहां से 2009 में जयंत चौधरी सांसद चुने गए थे। लेकिन, तब आरएलडी भाजपा के साथ गठबंधन में थी और यह सीट उसी गठबंधन की वजह से आरएलडी के खाते में आई थी। इस सीट से चौधरी चरण सिंह की बेटी ज्ञानवती भी चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन जनता ने उन्हें नकार दिया था। तमिलनाडु से ताल्लुक रखने वाली बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी भी जब 2014 में यहां चुनाव लड़ने पहुंचीं तो उन्हें खुद को धर्मेंद्र से शादी की वजह से जाट बताना पड़ा था। इस सीट पर भाजपा ने हेमा मालिनी पर तीसरी बार दाव लगाया है। जबकि इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस ने मुकेश धनगर को उम्मीदवार बनाया है। वहीं बसपा ने सुरेश सिंह को मैदान में उतारा है।

Loksabha Election 2024 : बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी 2014 से यहां हैं सांसद

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लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा की हेमा मालिनी ने सपा, बसपा और रालोद के संयुक्त उम्मीदवार कुंवर नरेंद्र सिंह को 2,90,023 वोट से हराकर दूसरी बार जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में हेमा मालिनी को 6,67,342 और कुंवर नरेंद्र सिंह को 3,77,319 वोट मिले थे। जबकि कांग्रेस के महेश पाठक ने महज 27,970 वोट पाकर जमानत जब्त करा ली थी। वहीं लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा की हेमा मालिनी ने रालोद के जयंत चौधरी को 5,30,743 वोट से हराकर करारी शिकस्त दी थी।

इस चुनाव में हेमा मालिनी को 6,74,633 और जयंत चौधरी को 1,43,890 वोट मिले थे। जबकि बसपा के विवेक निगम को 73,572 और सपा के दिनेश कर्दम महज 36,673 वोट मिले थे। मथुरा लोकसभा क्षेत्र का निर्वाचन संख्या 17 है। इसमें वर्तमान में 5 विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इस लोकसभा क्षेत्र का गठन मथुरा जिले के छाता, मांट, गोवर्धन, मथुरा और बलदेव विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर किया गया है। फिलहाल इन 5 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। यह लोकसभा क्षेत्र 1952 में अस्तित्व में आया था। यहां कुल 18,07,893 मतदाता हैं। जिनमें से 8,23,436 पुरुष और 9,84,255 महिला मतदाता हैं। बता दें कि मथुरा लोकसभा सीट पर 2019 में हुए चुनाव में कुल 10,98,112 यानी 61.03 प्रतिशत मतदान हुआ था।

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आजादी के बाद हुए पहले चुनाव में मथुरा लोकसभा सीट ने देश में चल रहे सियासी हवा के विपरीत चलने का अपना परिचय दिया। इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवारों का डंका बजा था। 1952 के चुनाव में राजा गिरराज शरण सिंह ने जीत दर्ज की। फिर 1957 के चुनाव में भी यही हुआ। इस चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जनसंघ के टिकट पर यहां से पर्चा भरा था। लोगों को उम्मीद थी कि कांग्रेस नहीं तो जनसंघ के लिए लोग अपना प्यार दिखाएंगे। लेकिन हुआ उल्टा। यह सीट निर्दलीय उम्मीदवार मुरसान के राजा महेंद्र प्रताप सिंह के खाते में चली गई। अटल बिहारी वाजपेयी की इस चुनाव में जमानत जब्त हो गई। उन्हें कुल दस प्रतिशत वोट मिले थे।

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पहले के दो चुनावों में भले ही यहां से निर्दलीय उम्मीदवारों पर जनता ने भरोसा जताया लेकिन उसके बाद 1962, 1967 और 1971 के चुनावों में कांग्रेस को लगातार तीन बार जीत दर्ज की। वहीं 1990 में देश में चल रहे राम लहर के दौरान भाजपा इस सीट पर लगातार चार बार जीत दर्ज करवाने में सफल रही है। बता दें कि 1991 में साक्षी महाराज और 1996, 1998 व 1999 के चुनावों में चौधरी तेजवीर सिंह भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। इसके अलावा जनता पार्टी से चुने जाने से पहले चौधरी दिगंबर सिंह दो बार कांग्रेस के टिकट पर भी सांसद रहे। मानवेंद्र सिंह पहले कांग्रेस फिर जनता दल और उसके बाद फिर कांग्रेस के टिकट पर सांसद रहे।

https://youtu.be/1LeiCxzVHXU?si=YCSQ6TxLL_1OepXJ

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