Lucknow Ice Cream Fraud: लखनऊ में आइसक्रीम वेंडर की गुंडागर्दी! न्यूजट्रैक के कैमरे में कैद हुआ पूरा खेल…पुलिस ने की लीपापोती

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Lucknow Ice Cream Fraud: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और शहर का दिल माने जाने वाले पॉश इलाके हजरतगंज में आज एक बड़ा प्रशासनिक और पुलिसिया ढुलमुल रवैया सामने आया है। हजरतगंज मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 2 के पास स्थित रॉयल स्काई रेस्टो एंड लाउंज के सामने एक आइसक्रीम वेंडर खुलेआम आम जनता की जेब और सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहा था। इस पूरी ठगी का खुलासा तब हुआ जब न्यूजट्रैक के पत्रकार आम ग्राहक बनकर वहां आइसक्रीम खरीदने पहुंचे। 35 रुपये की आइसक्रीम का दाम जब वेंडर ने सीधे 45 रुपये बताया और पैकेट से प्राइस टैग व एक्सपायरी डेट गायब पाई गई, तो इस फर्जीवाड़े की कड़ियां खुलती चली गईं।

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Lucknow Ice Cream Fraud: वेंडर का बेतुका तर्क

जब न्यूजट्रैक के पत्रकार ने वेंडर से प्राइस टैग मिटाने और मनमाने पैसे वसूलने पर सवाल किया, तो उसने जो जवाब दिया वह हैरान कर देने वाला था। वेंडर ने तर्क दिया कि उसके साथ कभी-कभी नकली नोटों से फ्रॉड हो जाता है, इसलिए वह दूसरों से ज्यादा पैसे वसूल कर अपने नुकसान की भरपाई करता है। इतना ही नहीं, उसने बेझिझक कबूल किया कि जब लोग उसे 50 रुपये का नोट देते हैं और उसके पास 5 रुपये का छुट्टा नहीं होता, तो वह 35 रुपये की आइसक्रीम सीधे 50 रुपये में ही चिपका देता है। जब पत्रकार ने इस पूरी गुंडागर्दी का वीडियो बनाना शुरू किया, तो वेंडर बहसबाजी करने लगा और भागने की कोशिश करने लगा।

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सूचना के 30 मिनट बाद पहुंची डायल 112

स्थिति बिगड़ती देख पत्रकार हर्ष श्रीवास्तव ने तुरंत यूपी पुलिस की आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल कर मदद मांगी। लेकिन सूबे की राजधानी में लखनऊ पुलिस की लाचारी और सुस्ती का आलम यह रहा कि घटना स्थल तक पहुंचने में डायल 112 की टीम को पूरे 30 मिनट लग गए। हद तो तब हो गई जब मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस अधिकारियों ने खुलेआम अवैध उगाही और सेहत से खिलवाड़ करने वाले वेंडर पर सख्त कानूनी कार्रवाई करने या उसे हिरासत में लेने के बजाय उसे सिर्फ समझाना-बुझाना शुरू कर दिया। पुलिस के इस रवैये को देखकर साफ लगा मानो वे कार्रवाई करने नहीं, बल्कि मामले को रफा-दफा करने आए हों।

किस कानून के तहत अपराध है यह जालसाजी?

आइसक्रीम या किसी भी खाद्य पदार्थ के रैपर के पिछले हिस्से पर ‘Best Before’ या ‘Expiry Date’ प्रिंट होती है। इसके साथ ही एमआरपी (MRP) यानी अधिकतम खुदरा मूल्य भी दर्ज होता है। एफएसएसएआई (FSSAI) के खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 52 (धारा 52 – मिसब्रांडेड फूड) और धारा 55 के तहत पैकेट से प्राइस टैग या एक्सपायरी डेट मिटाकर बेचना गंभीर कानूनी अपराध है। इसके अलावा लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 की धारा 36 के तहत एमआरपी से ज्यादा वसूलने या प्राइस टैग से छेड़छाड़ करने पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान है। ऐसे मामलों में लीगल एक्शन के साथ-साथ वेंडर का लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।

एक्सपायरी डेट आइसक्रीम खाने से क्या हैं नुकसान?

एक्सपायर हो चुकी या बिना डेट वाली आइसक्रीम खाना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। समय सीमा बीत जाने के बाद आइसक्रीम में बैक्टीरिया (जैसे साल्मोनेला और लिस्टीरिया) पनपने का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसी आइसक्रीम खाने से फूड पॉइजनिंग, पेट में तेज दर्द, उल्टी, दस्त, डिहाइड्रेशन और गंभीर इंफेक्शन जैसी बीमारियां हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ऐसी आइसक्रीम सेहत से सीधा खिलवाड़ है।

VIP इलाके में लखनऊ पुलिस की कार्यशैली पर उठे तीखे सवाल

हजरतगंज वह इलाका है जहां से कुछ ही दूरी पर पूरा शासन-प्रशासन और मुख्यमंत्री कार्यालय स्थित है। ऐसे अति-संवेदनशील और वीआईपी इलाके में जब एक पत्रकार की सजगता के बावजूद पुलिस का यह ढुलमुल और लाचार रवैया देखने को मिल रहा है, तो आम जनता की सुरक्षा और सुनवाई पर बड़े प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। जब आपातकालीन पुलिस सेवा 112 की प्रतिक्रिया इतनी धीमी होगी और मौके पर पहुंचकर पुलिस आरोपियों को संरक्षण देती नजर आएगी, तो लखनऊ की जनता किस पर भरोसा करेगी? इस पूरी घटना ने लखनऊ पुलिस की मुस्तैदी और जनसेवा के दावों की पोल खोलकर रख दी है।

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