Madhya Pradesh: अपनी ही सरकार पर आखिर क्यों भड़के शिवराज सिंह चौहान? बोले- ये तो अति है… अति!

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Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी ही पार्टी की सरकार के अधिकारियों पर नाराज हो गए। मामला विदिशा संसदीय क्षेत्र के बुधनी विधानसभा इलाके के कोसमी गांव का है, जहां वन विभाग और जिला प्रशासन पर आदिवासी परिवारों के घर तोड़ने, फसलें नष्ट करने और कुएं को मिट्टी से भरने के आरोप लगे हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही शिवराज सिंह चौहान गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। वहां का हाल देखकर उन्होंने अधिकारियों की कार्रवाई पर कड़ा गुस्सा जाहिर किया और इसे अन्याय की पराकाष्ठा बताया।

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Madhya Pradesh: ‘सुबह तक घर आबाद थे, अब बच्चों की चीखें गूंज रही हैं’

कोसमी गांव में हुई कार्रवाई को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने बेहद भावुक अंदाज में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जिन घरों में सुबह तक बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, वहां अब बच्चों की चीखें सुनाई दे रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवारों के मकान तोड़ दिए गए और उनके घरों के नीचे ही उनकी फसलें दबा दी गईं। इतना ही नहीं, कुओं को भी मिट्टी से भर दिया गया, जिससे लोगों के सामने रहने और आजीविका का संकट खड़ा हो गया।

शिवराज ने कहा कि ये परिवार वर्षों से अपने घरों में रह रहे थे और उनकी मेहनत से तैयार हुई फसलें भी इस कार्रवाई की भेंट चढ़ गईं। उन्होंने अधिकारियों की संवेदनशीलता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी के घर और रोजी-रोटी को इस तरह तबाह करना बेहद गंभीर मामला है।

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उन्होंने गुस्से में कहा, ‘मेरे क्षेत्र में जुल्म की पराकाष्ठा हुई है। अन्याय की इंतहा हुई है।’ इसके बाद उन्होंने बार-बार कहा, ‘ये तो अति है… अति…’ शिवराज ने यह भी कहा कि गरीब परिवारों के साथ हुए अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और उन्हें हर संभव न्याय दिलाने की कोशिश की जाएगी।

पहले भी कार्रवाई रोकने के लिए अधिकारियों से हुई थी बात

शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, कुछ महीने पहले भी गांव में इसी तरह की कार्रवाई करने की कोशिश की गई थी। उस समय उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की थी और आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रविवार को दोबारा कार्रवाई किए जाने का आरोप सामने आया है।

इस बात ने शिवराज की नाराजगी को और बढ़ा दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले ही इस मामले पर बातचीत हो चुकी थी, तो फिर परिवारों के घरों और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई क्यों की गई। उनके मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में केवल मकान नहीं टूटे, बल्कि परिवारों की आजीविका भी प्रभावित हुई है।

मुख्य सचिव को फोन, मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने उठाएंगे मामला

गांव पहुंचने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन किया और पूरे मामले पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बात कर गरीब परिवारों के घर तोड़े जाने की जानकारी दी।

शिवराज ने कहा कि वह इस मामले को मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने भी रखेंगे। उन्होंने साफ किया कि प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही, उन्होंने कार्रवाई के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन के किसी बड़े अधिकारी के मौके पर मौजूद नहीं होने पर भी नाराजगी जताई।

बेघर परिवारों के लिए नए घर और अस्थायी व्यवस्था का भरोसा

शिवराज सिंह चौहान के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाने की व्यवस्था की जाएगी। जब तक उनके रहने का स्थायी इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक उनके रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है।

शिवराज ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब परिवार के साथ ऐसा अन्याय न हो। हालांकि, नए घरों और राहत व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

कांग्रेस ने बताया शिवराज और मोहन यादव के बीच खींचतान का मामला

कोसमी की घटना को लेकर कांग्रेस ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव के बीच आपसी खींचतान से जोड़ते हुए आरोप लगाया कि इसका नुकसान गरीब आदिवासी परिवारों को उठाना पड़ रहा है।

सिंघार ने सोशल मीडिया पर कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा, ‘मोहन-मामा की आपसी खींचतान में उजड़ रहे आदिवासी परिवार।’ उन्होंने दावा किया कि कोसमी गांव में बरेला आदिवासी समुदाय के परिवारों के मकान तोड़े जा रहे हैं और उनकी फसलें नष्ट की जा रही हैं।

कांग्रेस नेता का कहना है कि भाजपा सरकार के भीतर कथित खींचतान के कारण गरीब परिवारों के सामने बेघर होने का संकट पैदा हो गया है। हालांकि, आपसी खींचतान के आरोप कांग्रेस की ओर से लगाए गए हैं।

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