आम आदमी के लिए खुशखबरी: अगले महीने सस्ता हो सकता है सरसों का तेल, कारोबारियों ने बताई ये वजह

Facebook
X
WhatsApp

सरसों और रिफाइंड तेल के बेकाबू होते दाम को लेकर अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ भी गंभीर है. इसी के चलते महासंघ ने केन्द्र सरकार से मामले में दखल देने के लिए एक चिठ्ठी लिखी थी. इसी के चलते 24 मई को केन्द्र सरकार के संबंधित विभाग ने एक बैठक बुलाई थी. बैठक में महासंघ के साथ ही तेल कारोबारी भी शामिल हुए.

महासंघ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने तेल के बढ़ते दामों को काबू में करने के लिए केन्द्र सरकार  को दो रास्ते सुझाए हैं. उनका कहना है कि अगर सरकार इन्हें मान लेती है तो आम लोगों को इसका बड़ा फायदा मिलेगा.

अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने बैठक में अपने सुझाव देते हुए कहा, “सरकार ने तेल पर कृषि कल्याण सेस लगाया हुआ है. वहीं तेल और तिलहन पर जीएसटी लगाया हुआ है. इस साल तेलों के दाम आसमान छूने से सरकार को कृषि कल्याण सेस से राजस्व में मोटा मुनाफा हुआ है, इसलिए सरकार को चाहिए कि अब आम जनता को नजर में रखते हुए इसको हटा दे.
वहीं जीएसटी को भी 00 फीसद कर दे. इसके साथ ही अगर सरकार कमोडिटी एक्सचेंज पर हो रहे वायदे और सट्टे रूपी “खेले” को भी बंद कर दे तो इसके द्वारा कुछ बड़े सटोरिए जो पूरे बाजार को हिलाकर रख देते हैं और जिसका खामियाजा छोटे उत्पादकों और किसानों  को उठाना पड़ता है पर भी रोक लगाई जा सकती है.”

राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर का कहना है,  “बीते साल से रिफाइंड पामोलिन पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाने की जरूरत है. देश के अंदर कुछ राज्यों में रिफाइनरी की कमी और कुछ राज्यों में रिफाइनर का ना होना उत्पादन और सप्लाई चेन को बाधित करता है. ऐसे वक्त में कुछ लोग मौके का फायदा उठाते हैं. ये भी दामों के बढ़ने की वजह बनता है और कोरोना के संक्रमण ने रिफाइनरीओ की कार्य क्षमता पर भी असर डाला है. बैठक में कुछ संगठनों द्वारा परिवर्तनशील आयात सूल्क लागू करने का सुझाव दिया जिससे दाम बढ़ने पर आयात शुल्क अपने आप कम हो जाए और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दाम कम होने पर आयात शुल्क बढ़ जाए.”

बैठक के दौरान केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों के मुख्य सचिव और खाद्य तेल के बड़े संगठनों में अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ,सी, सोपा, कोयट, आईवीपीए और अन्य राष्ट्रीय संगठन के प्रतिनिधि एवं राज्य सरकारों के आपूर्ति विभाग के अधिकारी मौजूद रहे.

The specified slider does not exist.

ताजा खबरें