कागजी कार्रवाई में उलझे रहे लोग,पूर्व राजनयिक अशोक अमरोही ने अस्पताल के बाहर ही तड़पते हुए तोड़ा दम

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कोरोना महामारी भारत सरकार के साथ साथ राज्य सरकारों की नाकामयाबी को परत दर परत उघार रही है। देश की सरकार दावों की बरसात कर रही है लेकिन हकीकत ये है कि देश के पूर्व राजनिक तक को अस्पताल के बाहर तड़प-तड़पकर जान देने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई देशों में भारतीय राजदूत रह चुके अशोक अमरोही 5 घंटे से ज्यादा वक्त तक अस्पताल के बाहर इलाज के लिए तड़पते रहे, लेकिन उन्हें अस्पताल में दाखिला नहीं मिला और फिर अशोक अमरोही की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

तड़प-तड़पकर पूर्व राजनयिक का निधन

कई देशों में भारतीय राजनयिक रह चुके अशोक अमरोही का गुड़गांव के मेदांता अस्पताल के बाहर तड़प-तड़पकर मौत हो गई। वो पांच घंटे से ज्यादा वक्त तक अस्पताल की पार्किंग में भर्ती होने का इंतजार करते रहे लेकिन उन्हें अस्पताल में दाखिल नहीं करवाया गया। मेदांता अस्पताल मे अशोक अमरोही के परिवारवालों को कागजी कार्रवाई में ही उलझाए रखा लेकिन उन्हें भर्ती नहीं किया। अब जब पूर्व राजनयिक अशोक अमरोही का निधन हो चुका है तो तमाम नेता उन्हें शोक संदेश समर्पित कर रहे हैं। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ट्वीट कर अशोक अमरोही को अपना अच्छा दोस्त बताया है लेकिन इस सवाल का जबाव कोई देने के लिए तैयार नहीं है कि आखिर अशोक अमरोही को अस्पताल में भर्ती क्यों नहीं किया है और इस लापरवाही के लिए किसे दोषी ठहराया जाए। अशोक अमरोही ब्रूनेई, अल्जीरिया, मोजांबिया में भारत के प्रतिनिधि के तौर पर काम कर चुके है।

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