Bageshwar Baba Bengal Controversy: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बागेश्वर धाम के पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री उर्फ बागेश्वर बाबा के एक बयान को लेकर बवंडर मचा हुआ है। दुर्गा पूजा को लेकर बाबा बागेश्वर द्वारा दी गई टिप्पणी के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस नेताओं की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती जा रही हैं। बाबा के पोस्टर जलाने और उनके खिलाफ नारेबाजी करने के मामले में कोलकाता पुलिस ने कड़ा रुख अपना लिया है। राज्य कांग्रेस महासचिव आशुतोष चटर्जी को भवानीपुर पुलिस स्टेशन से समन भेजकर पूछताछ के लिए पेश होने का कड़ा निर्देश दिया गया है। इससे पहले पुलिस इसी मामले में कोलकाता जिला कमेटी के महासचिव अतनु दास को भी गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज चुकी है।
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Bageshwar Baba Bengal Controversy: बयान पर क्यों भड़की कांग्रेस?
इस पूरे विवाद की नींव उस वक्त पड़ी जब बंगाल दौरे पर आए बागेश्वर बाबा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए एक बड़ा बयान दे दिया। उन्होंने बंगाली समुदाय के लोगों से दुर्गा पूजा उत्सव के दौरान मांसाहारी भोजन त्यागने की भावुक अपील की। (Bageshwar Baba Bengal Controversy) बाबा बागेश्वर ने कहा कि पवित्र धार्मिक अवसरों पर मांस का सेवन करने वाले लोग वास्तव में ‘पाखंडी’ हैं। उनके इस बयान पर विवाद का तूफान खड़ा हो गया। कांग्रेस पार्टी ने इसे बंगालियों की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का अपमान बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी। कांग्रेस का आरोप था कि इस तरह की बयानबाजी से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है।
भवानीपुर में जले पोस्टर तो भड़के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी
बागेश्वर बाबा के खिलाफ बनते माहौल और भवानीपुर थाने के बाहर उनके पोस्टर जलाए जाने की घटना ने राजनीतिक पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। (Bageshwar Baba Bengal Controversy) उन्होंने एक सार्वजनिक सभा के दौरान खुले मंच से चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य में अब तुष्टीकरण की राजनीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कोलकाता के पुलिस आयुक्त को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा कि धार्मिक संतों के पोस्टर जलाने वाले उपद्रवियों को चिन्हित कर तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
CM ने सार्वजनिक रूप से खाया मछली का भोग
विवाद को शांत करने और अपनी बात को तार्किक रूप से सामने रखने के लिए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बेहद अनोखा अंदाज अपनाया। कौशिकी अमावस्या के पावन अवसर पर वे सिद्ध पीठ पहुंचे और मां काली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। (Bageshwar Baba Bengal Controversy) इसके बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में फर्श पर बैठकर बसंती पुलाव के साथ तली हुई मछली और ‘मछली का मूरा’ प्रसाद के रूप में ग्रहण किया। उनकी यह तस्वीर सोशल मीडिया पर देखते ही देखते वायरल हो गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि शास्त्री जी ने एक संत के नाते अपनी व्यक्तिगत राय व्यक्त की थी, जिसे किसी पर जबरन थोपा नहीं गया था। जो इसे मानना चाहते हैं वे मानेंगे और जो नहीं मानना चाहते वे स्वतंत्र हैं।
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समन मिलने के बाद कांग्रेस में खलबली
भवानीपुर पुलिस स्टेशन से नोटिस मिलने के बाद कांग्रेस नेताओं में हड़कंप मच गया है। राज्य कांग्रेस महासचिव आशुतोष चटर्जी ने बताया कि उन्हें सुबह 10 बजे पुलिस का नोटिस मिला, जिसमें दोपहर तीन बजे तक जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने का हुक्म दिया गया था। (Bageshwar Baba Bengal Controversy) चटर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार को दे दी है। फिलहाल पुलिस पूरे इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि प्रदर्शन में शामिल अन्य चेहरे बेनकाब हो सकें। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने बंगाल में एक बार फिर धर्म, खान-पान की परंपरा और राजनीति के त्रिकोण को पूरी तरह गरमा दिया है।










