Punjab CBI Raid: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार मामले में CBI की कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में भूचाल आ गया है। CBI ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित कैंप ऑफिस समेत पंजाब और चंडीगढ़ में कुल 8 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई में लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं। अब CBI ने CM के OSD राजबीर घुम्मन समेत FIR में नामजद सभी 6 आरोपियों को बुधवार को चंडीगढ़ कार्यालय में पेश होने का समन भेजा है।
इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने BJP और केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पंजाब में ED और CBI को कुछ नहीं मिलेगा और केंद्रीय जांच एजेंसियां “खाली हाथ लौटेंगी।” मान ने आरोप लगाया कि BJP ने पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल उनकी सरकार को बदनाम करने के लिए किया जा रहा है।
Punjab CBI Raid: 8 ठिकानों पर CBI की छापेमारी
CBI ने मंगलवार को चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में आठ ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। इनमें सेक्टर-2, चंडीगढ़ स्थित वह सरकारी आवास भी शामिल है, जिसे मुख्यमंत्री के पूल से कैंप ऑफिस के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था और जहां राजबीर सिंह घुम्मन रह रहे थे।
इसके अलावा संगरूर के घड़ाचों गांव स्थित घुम्मन के पैतृक घर और अन्य आरोपियों से जुड़े परिसरों पर भी तलाशी ली गई। CBI के मुताबिक तलाशी के दौरान इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, मोबाइल फोन, लैपटॉप और प्रशासनिक व वित्तीय दस्तावेज जब्त किए गए हैं। इनकी जांच कथित रिश्वतखोरी और अनियमितताओं के सबूत जुटाने के लिए की जा रही है।
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आज CBI के सामने पेश होंगे 6 आरोपी
छापेमारी के अगले ही दिन CBI ने FIR में नामजद सभी छह आरोपियों को तलब किया है। राजबीर सिंह घुम्मन के अलावा Nitin Gohal, Jitin Gohal उर्फ राजा, Romi Raja Mahajan, Bir Devinder और RS Nagra को पूछताछ के लिए बुलाया गया है। घुम्मन को बुधवार दोपहर चंडीगढ़ स्थित CBI कार्यालय में पेश होने को कहा गया है।
CBI की FIR में घुम्मन समेत दो सरकारी कर्मचारियों और कथित बिचौलियों/सहयोगियों के खिलाफ जांच की जा रही है।
आखिर क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला Enforcement Directorate यानी ED की ओर से पंजाब के DGP को भेजी गई जानकारी से शुरू हुआ। ED ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों के जरिए सरकारी अधिकारियों की पोस्टिंग और ट्रांसफर प्रभावित किए जा रहे थे।
जांच में कथित तौर पर IAS और IPS अधिकारियों की पोस्टिंग, विभागीय कार्रवाई, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंसिंग, जमीन के इस्तेमाल में बदलाव यानी CLU, संपत्ति विवाद और राजस्व से जुड़े मामलों में कथित आर्थिक लाभ के बदले हस्तक्षेप के आरोप सामने आए।
CBI का आरोप है कि कुछ सरकारी अधिकारियों ने सरकारी आदेशों और नीतियों के आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले उनके ड्राफ्ट निजी लोगों तक पहुंचाए। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क में कथित तौर पर रिश्वत और प्रभाव के इस्तेमाल की जांच कर रही है।
ED की जांच में सामने आया था कथित ‘कैश फॉर ट्रांसफर’ नेटवर्क
मामले की जड़ ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ी है। ED ने आरोप लगाया था कि Nitin Gohal कथित तौर पर सरकारी कामकाज में प्रभाव डालने वालों और राजबीर घुम्मन के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाता था।
ED की कार्रवाई एक हाउसिंग सोसाइटी से जुड़े कथित फर्जी Change of Land Use यानी CLU दस्तावेजों और GMADA से जुड़े मामले की जांच के दौरान सामने आई थी। ED ने मई में कई परिसरों पर तलाशी ली थी और उसके बाद पंजाब के DGP को पत्र भेजकर FIR दर्ज करने की मांग की थी।
हाई कोर्ट में पेश सामग्री के मुताबिक ED ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल ट्रांसफर-पोस्टिंग, गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच, हथियार लाइसेंस और सरकारी मंजूरियां दिलाने के लिए किया जा रहा था। कथित नेटवर्क में करोड़ों रुपये की नकदी, जमीन और अन्य लाभ की बात भी सामने आई।
हाई कोर्ट ने क्यों CBI को सौंपी जांच?
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 5 अक्टूबर को मामले में CBI जांच का आदेश दिया था। अदालत ने कहा कि उसके सामने रखी गई सामग्री के आधार पर मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत है। कोर्ट ने पंजाब पुलिस की अब तक की कार्रवाई के तरीके पर भी सवाल उठाए और CBI को FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
CBI को दो महीने के भीतर जांच की स्थिति पर रिपोर्ट देने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होनी है।
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ भगवंत मान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पंजाब सरकार ने दलील दी है कि हाई कोर्ट का CBI जांच का आदेश संघीय ढांचे से जुड़े सवाल खड़े करता है।
राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि मामला मुख्य रूप से ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रशासनिक फैसलों से संबंधित है और CBI को सीधे जांच सौंपना उचित नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए मामला लेने पर सहमति जताई है और तत्काल सुनवाई की मांग पर बुधवार या गुरुवार को लिस्टिंग पर विचार करने की बात कही है।
यानी फिलहाल एक तरफ CBI ने जांच शुरू कर दी है, वहीं दूसरी तरफ पंजाब सरकार इस जांच को चुनौती देकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।
भगवंत मान बोले- ‘एजेंसियां खाली हाथ लौटेंगी’
CBI कार्रवाई के बाद भगवंत मान ने केंद्र और BJP पर हमला तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आते ही केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मान ने दावा किया कि ED और CBI को पंजाब में कुछ नहीं मिलेगा और एजेंसियां खाली हाथ लौटेंगी।
मान ने BJP को चुनौती देते हुए कहा कि केंद्र को पश्चिम बंगाल और दिल्ली जैसे राज्यों में चुनाव की तैयारी करनी चाहिए। उनके बयान से साफ है कि AAP इस पूरे मामले को सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच के तौर पर नहीं, बल्कि राजनीतिक लड़ाई के तौर पर भी पेश कर रही है।
BJP का पलटवार- ‘CBI हाई कोर्ट के आदेश पर आई है’
BJP ने भगवंत मान के आरोपों को खारिज किया है। पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि CBI की कार्रवाई BJP के कहने पर नहीं, बल्कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद हुई है।
BJP का कहना है कि अगर सरकार या उसके अधिकारियों ने कुछ गलत नहीं किया है तो जांच से घबराने की जरूरत नहीं है और संबंधित दस्तावेज जांच एजेंसी के सामने पेश किए जाने चाहिए।
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी मान सरकार पर हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि CBI को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और करीब 200 पन्नों की चैट मिली है और इनसे GLADA तथा GMADA से जुड़े कथित घोटालों की परतें खुल सकती हैं। हालांकि ये BJP नेताओं के आरोप हैं और इन दावों की जांच अभी जारी है।
एक और बड़ा अपडेट- CM के रिश्तेदार को ED का समन
इस पूरे मामले के बीच एक और अहम घटनाक्रम सामने आया है। ED ने भगवंत मान के बहनोई अमरदीप सिंह ग्रेवाल को भी पूछताछ के लिए समन भेजा है। उन्हें 9 अक्टूबर को दिल्ली स्थित ED कार्यालय में पेश होने को कहा गया है।
ED का यह कदम भी मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रभाव के इस्तेमाल की व्यापक जांच का हिस्सा बताया जा रहा है।
चुनाव से पहले बढ़ी सियासी गर्मी
पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले CBI की यह कार्रवाई AAP सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। AAP इसे BJP की केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग से जोड़ रही है, जबकि BJP इसे हाई कोर्ट के आदेश पर हुई कानूनी कार्रवाई बता रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि CBI की जब्त की गई इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और दस्तावेजों से जांच में क्या सामने आता है और सुप्रीम कोर्ट पंजाब सरकार की उस चुनौती पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल CBI की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।








