Bihar SIR Protest: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। गुरुवार को पटना की सड़कों पर महागठबंधन के विरोध-प्रदर्शन के दौरान जमकर गहमागहमी देखने को मिली। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजभवन की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रास्ते में रोक दिया। इस दौरान तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया और कुछ देर के लिए मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
Bihar Protest: राजभवन पहुंचने से पहले रोके गए तेजस्वी यादव
महागठबंधन ने चुनाव आयोग और SIR की प्रक्रिया के विरोध में गुरुवार को राजभवन मार्च का आह्वान किया था। इसी के तहत तेजस्वी यादव की अगुवाई में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारी राजभवन की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इसके बाद तेजस्वी यादव और कई अन्य नेताओं को हिरासत में लिया गया।
तेजस्वी यादव को जिस पुलिस वाहन में बैठाया गया, उसके आसपास कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई। कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया, जिससे कुछ देर तक तनाव की स्थिति बनी रही।
पांच लेयर की बैरिकेडिंग, RAF के जवान भी तैनात
राजभवन मार्च को देखते हुए पटना प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील इलाकों तक पहुंचने से रोकने के लिए पांच स्तर की बैरिकेडिंग लगाई गई।
कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी तैनात किए गए। किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए वाटर कैनन की व्यवस्था भी की गई थी। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनी रहे और आम लोगों को यातायात संबंधी परेशानियों का सामना कम करना पड़े।
‘ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र का मजाक बनाया’ तेजस्वी यादव
राजभवन मार्च के दौरान तेजस्वी यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
तेजस्वी यादव ने कहा, ‘जिस हिसाब से ज्ञानेश कुमार ने लोकतंत्र का मजाक बनाया है, जिस हिसाब से लोकतंत्र को ये लोग खत्म करने का प्रयास कर रहे हैं, ये बिहार की धरती है और लोकतंत्र की जननी से इन लोगों ने SIR की शुरुआत की।’
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष संविधान में विश्वास करता है और लोकतंत्र को कमजोर नहीं होने देगा। तेजस्वी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोप तेजस्वी यादव के राजनीतिक बयान हैं। इनसे किसी अनियमितता के साबित होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
534 प्रखंडों से शुरू हुआ आंदोलन, अब पटना में प्रदर्शन
महागठबंधन ने SIR के विरोध में चरणबद्ध आंदोलन का कार्यक्रम घोषित किया था। इसके तहत 7 अक्टूबर को बिहार के सभी 534 प्रखंड मुख्यालयों पर आक्रोश मार्च और पुतला दहन का कार्यक्रम रखा गया था। इसके अगले दिन यानी 8 अक्टूबर को जिला मुख्यालयों पर विरोध-प्रदर्शन और राजधानी पटना में राजभवन मार्च का आह्वान किया गया। महागठबंधन का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी आपत्तियों का समाधान होना चाहिए और चुनाव आयोग को विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देना चाहिए।
आखिर SIR को लेकर क्यों मचा है सियासी बवाल?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करना है।लेकिन विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, मतदाता सूची का पुनरीक्षण चुनाव आयोग की वैधानिक जिम्मेदारियों का हिस्सा है। प्रक्रिया में अनियमितता हुई है या नहीं, यह संबंधित दस्तावेजों, जांच और आधिकारिक निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो सकता है। फिलहाल बिहार में यह मुद्दा राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है। राजभवन मार्च के दौरान तेजस्वी यादव की हिरासत के बाद विवाद और तेज हो गया है।
पटना की सड़कों पर गुरुवार को हुए प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि SIR को लेकर विपक्ष अपना विरोध जारी रखने के मूड में है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि महागठबंधन आगे क्या कदम उठाता है और चुनाव आयोग की ओर से उठाए गए सवालों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।









