करवा चौथ पर कहीं जल्दी तो कहीं देर से निकलेगा चांद, जानिए पिछले 5 सालों के चंद्र दर्शन का समय

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कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ व्रत रखा जाता है। हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व होता है। इस साल करवा चौथ 24 अक्टूबर 2021, दिन रविवार को रखा जाएगा। करवा चौथ के दिन चंद्र दर्शन के बिना व्रत अधूरा माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने से चंद्र देव पति को लंबी आयु और खुशहाल वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन का कारक माना जाता है।हर जगह पर चांद निकलने का समय अलग-अलग होता है। कुछ स्थानों पर चंद्र दर्शन जल्दी हो जाते हैं, तो कुछ जगहों पर व्रती महिलाओं को इंतजार करना पड़ता है। इस साल चंद्रोदय का समय 08 बजकर 11 मिनट है।

छले पांच सालों में करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय-

4 नवंबर 2020 चंद्र दर्शन का समय- रात 08 बजकर 12 मिनट पर।
17 अक्टूबर 2019 चंद्र दर्शन का समय- रात 08 बजकर 16 मिनट।
27 अक्टूबर 2018 चंद्र दर्शन का समय- रात 07 बजकर 55 मिनट पर।
8 अक्टूबर 2017 चंद्र दर्शन का समय- रात 08 बजकर 10 मिनट पर।
19 अक्टूबर 2016 चंद्र दर्शन का समय- रात 08 बजकर 46 मिनट पर।

शुभ मुहूर्त-

करवा चौथ पर रोहिणी नक्षत्र में चांद निकलेगा। 24 अक्टूबर को सुबह 03 बजकर 01 मिनट पर चतुर्थी तिथि लगेगी और अगले दिन 25 अक्टूबर को सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। चांद निकलने का समय 08 बजकर 11 मिनट पर है। करवा चौथ के दिन पूजन का शुभ समय 06 बजकर 55 मिनट से लेकर 08 बजकर 51 मिनट तक रहेगा।

करवा चौथ पूजा विधि-

इस व्रत में महिलाएं दोपहर में या शाम को कथा सुनती हैं। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इस बात का ध्यान रखें कि सभी करवों में रौली से सतियां बना लें। अंदर पानी और ऊपर ढ़क्कन में चावल या गेहूं भरें। कथा के लिए पटरे पर चौकी में जलभरकर रख लें। थाली में रोली, गेंहू, चावल, मिट्टी का करवा, मिठाई, बायना का सामान आदि रखते हैं। प्रथम पूज्य गणेश जी की पूजा से व्रत की शुरुआत की जाती है। गणेश जी विघ्नहर्ता हैं इसलिए हर पूजा में सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाती है। इसके बाद शिव परिवार का पूजन कर कथा सुननी चाहिए। करवे बदलकर बायना सास के पैर छूकर दे दें। रात में चंद्रमा के दर्शन करें। चंद्रमा को छलनी से देखना चाहिए। इसके बाद पति को छलनी से देख पैर छूकर व्रत पानी पीना चाहिए।

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