Manish Sisodia Case Hearing: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका को खारिज कर दिया. सिसोदिया पर दिल्ली की शराब नीति में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं.
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सिसोदिया के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और उनकी जमानत याचिका को खारिज करने के लिए पर्याप्त आधार हैं.
शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सिसोदिया के खिलाफ मुकदमे को 6 से 8 महीने के भीतर पूरा किया जाना चाहिए. (Manish Sisodia Case Hearing) अगर मुकदमे की प्रक्रिया धीमी रहती है, तो सिसोदिया तीन महीने के भीतर फिर से जमानत के लिए याचिका दायर करने के लिए हकदार होंगे.
Manish Sisodia Case Hearing: सिसोदिया पर क्या आरोप हैं?
सिसोदिया पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की शराब नीति में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए भ्रष्टाचार किया था. आरोप है कि उन्होंने इन कंपनियों को ठेके देने के लिए अफसरों को भी प्रभावित किया था.
सिसोदिया ने इन आरोपों को खारिज किया है. (Manish Sisodia Case Hearing) उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है. सिसोदिया के जमानत याचिका खारिज होने के बाद आम आदमी पार्टी ने कहा है कि यह फैसला राजनीतिक है. पार्टी ने कहा है कि सिसोदिया को झूठे आरोपों में फंसाया गया है. दिल्ली शराब नीति घोटाले में सिसोदिया इकलौते नेता नहीं हैं. हाल ही में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी ईडी ने गिरफ्तार किया था.















