Bengal violence NIA report: पश्चिम बंगाल में चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, वैसे-वैसे राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद गहराता जा गया है। अब हाल ही में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट ने कई चौंका देने वाले खुलासे किए हैं। रिपोर्ट के अमुसार, मालदा सहित कई इलाकों में भड़की हिंसा और न्यायिक अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से पूर्व-नियोजित साजिश का हिस्सा थी।
Bengal violence NIA report: 1500 लोगों की भीड़, जजों को 13 घंटे तक घेरा
NIA की आरंभिक जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि लगभग 1500 लोगों की भीड़ ने एक ब्लॉक कार्यालय को घेर लिया, जहां चुनावी प्रक्रिया से संबंधित काम हो रहे थे। इस दौरान 7 न्यायिक अधिकारियों को 13 घंटे से अधिक वक़्त तक बंधक बनाकर रखा गया। (Bengal violence NIA report) एक महिला जज को तो लगभग 8 घंटे तक सड़क पर रोककर रखा गया, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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मस्जिद से ऐलान और ई-रिक्शा से भीड़ इकठ्ठा करने का आरोप
रिपोर्ट में यह भी साफ़-साफ़ दावा किया गया है कि भीड़ को जमा करने के लिए स्थानीय नेटवर्क का प्रयोग किया गया। (Bengal violence NIA report) मस्जिदों से ऐलान किए गए और ई-रिक्शा पर माइक लगाकर लोगों को बुलाया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, यह पूरी घटना कम से कम 72 घंटे की योजना के अंतर्गत अंजाम दी गई।
महिलाओं को आगे कर किया गया पथराव
NIA ने एक और महत्वपूर्ण पैटर्न की तरफ इशारा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के दौरान महिलाओं को आगे कर दिया गया, जबकि पुरुष पीछे से पथराव की घटना को अंजाम दे रहे थे। इन सब के बीच इससे सुरक्षा बलों के लिए कार्रवाई करना बहुत ही मुश्किल हो गया। जब न्यायिक अधिकारियों को वहां से निकालने का पूरा प्रयास किया गया, तब उनके काफिले पर पथराव किया गया, जिसमें एक वाहन चालक घायल हो गया और वाहन पलट गया।
घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में भी एक गंभीर चूक सामने आई है। (Bengal violence NIA report) रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 16 में से 9 CCTV कैमरे खराब थे और मुख्य गेट का कैमरा भी काम नहीं कर रहा था। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं हो सकी, जिससे साजिश के पहलुओं को समझना और भी मुश्किल हो गया है।
12 FIR की जांच NIA को सौंपी
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज 12 FIR की जांच NIA को सौंप दी है। (Bengal violence NIA report) अदालत ने यह निर्णय स्थानीय पुलिस पर लगे आरोपों को ध्यान में रखते हुए लिया। कोर्ट ने स्पष्त रूप से संकेत दिए हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यकता है।
इसी बीच भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल की अंतिम वोटर लिस्ट भी जारी कर दी है। इस लिस्ट में तकरीबन 90.66 लाख वोटर्स के नाम काट दिए गए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, यह कार्रवाई सत्यापन प्रक्रिया के अंतर्गत की गई है, जिसमें फर्जी या संदिग्ध नामों को हटाया गया।
हालांकि, इस मुद्दे पर राज्य की सियासत गरमा गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम हटाए गए हैं। वहीं विपक्ष का दावा है कि सिर्फ उन्हीं नामों को हटाया गया है जिनमें बड़ी गड़बड़ी पाई गई।
कोर्ट के सख्त आदेश और बढ़ी सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सख्त आदेश दिए हैं कि वह राज्य में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करे। इसके लिए भारी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। (Bengal violence NIA report) रिपोर्ट के अनुसार, हजारों पैरामिलिट्री जवानों को तैनात किया गया है और अतिरिक्त बलों को स्टैंडबाय पर रखा गया है।
अब आगे क्या?
आपको बता दे, इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 13 अप्रैल को होनी है, जहां NIA अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश कर सकती है। (Bengal violence NIA report) वहीं जिन वोटर्स के नाम लिस्ट से हटाए गए हैं, वे ट्रिब्यूनल का रुख कर सकते हैं।
चुनावी माहौल के बीच पश्चिम बंगाल में इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ कानून-व्यवस्था पर गंभीर रूप से सवाल खड़े किए हैं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। आगामी दिनों में सुप्रीम कोर्ट और NIA की कार्रवाई इस मामले की दिशा तय करेगी।














